प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम / कहते हैं कि काल के आगे किसी की नहीं चलती, या यूं कहो कि विधाता ने जो रच दिया उसको कोई टाल नहीं सकता। बता दें कि 1 माह पूर्व हुए ट्रेवल संचालक अनुराग चतुर्वेदी की बुलेट मोटरसाइकिल से आमने-सामने की टक्कर हुई थी। जिनका इलाज बंसल हॉस्पिटल भोपाल में चला था। उसके बाद वहां से वह अपने घर आ गए थे। इस बीच में वह अपने ट्रैवल्स पर भी गए थे, उस दौरान उन्होंने सबसे कहा कि मैं जल्दी ही दुकान पर बैठूंगा। लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था जब बीती शनिवार शाम को ये खबर आई कि अनुराग अब इस दुनिया में नहीं रहे। यह सुनकर किसी को विश्वास नहीं हो रहा था और हर कोई यह खबर सुनने वाला स्तब्ध रह गया कि ये क्या हो गया। अंतिम यात्रा में शामिल सैकड़ों लोगों की गवाही इस बात को प्रदर्शित कर रही थी कि सबके दिल में वह जगह बना चुके थे।

