प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/नगर के सुप्रसिद्ध घाट सेठानी घाट पर चल रही सप्त दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिवस में भागवत आचार्य पंडित सोमनाथ शर्मा ने रुद्र संहिता की कथा को प्रारंभ करते हुए नारद मोह प्रसंग को सुनाया और कहा कि नारद जी को जब मैं हो गया था तो अपनी इच्छा प्रकट करने के लिए भगवान के पास गए और उनसे कहा कि हे भगवान जिससे कार्य से मेरा भला हो वही आप कार्य कीजिएगा। भगवान ने नाराज जी के कल्याण के लिए सुंदर लीला की और उन्हें बंदर स्वरूप दे दिया भले ही नाराज जी ने क्रोधित होकर भगवान विष्णु को श्राप दिया लेकिन भगवान ने अपने भक्तों के भले के लिए इस शराब को भी अंगीकार किया कथा के चौथे दिन बेलपत्र की महिमा को बताया गया कि बेलपत्र का वृक्ष साक्षात लक्ष्मी जी का स्वरुप है और भगवान शिव को बेलपत्र बहुत प्रिय है। बेलपत्र के पूजन से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और सभी मन इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। आगे शिव महापुराण में कुबेर के सुंदर चरित्र को सुनाया गया कि किस प्रकार पूर्व जन्म में गुण निधि ने दीपदान किया था और आगे जाकर भगवान शिव की कृपा से वही गुड़ियाको के राजा कुबेर हुए शिव महापुराण की कथा में सती चरित्र का भी सुंदर वर्णन किया गया, कि दक्ष की पुत्री के रूप में मां दुर्गा की शक्ति का आधार है। उन्होंने सती का अवतार लिया और भगवान शंकर के अपमान के कारण दक्ष प्रजापति को उनका क्रोध सहन करना पड़ा और भगवान शंकर ने वीरभद्र को आज्ञा दे करके उसके सर को कटवा दिया। उसके पश्चात दक्ष प्रजापति केसर के स्थान पर भगवान शंकर ने बकरे का सर लगा दिया। इस कथा के माध्यम से शिव पुराण में बताया गया कि मनुष्य को अहंकार नहीं करना चाहिए सब कुछ दिया हुआ भगवान का है। जगत के आधार शक्ति और शिव है, वही जगत का संचालन करते हैं। इनकी आराधना करते हुए भक्ति करना चाहिए। जिससे सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं कथा के पंचम दिवस में शिव पार्वती विभाग का सुंदर वर्णन किया जाएगा। कथा का समय 2:00 से 6:00 बजे तक है। कथा का आयोजन श्री नीलकंठ महादेव समिति समिति के द्वारा कराया जा रहा है।

