प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम / घर के व्यस्ततम कार्य के बाद भी समय निकाल कर अपनी लेखनी को कलम के माध्यम से पाठकों के बीच प्रेषित कर रही हैं, शहर की उभरती हुई लेखिका रेखा रतनानी। श्रीमती रेखा रतनानी ने बताया कि प्रयागराज की “मां गंगा” पर लिखी बाल काव्य का एक पुस्तक पर काव्य फाउंडेशन द्वारा एक ग्रुप में स्थान दिया गया है। श्रीमती रेखा रतनानी से पूछे गए सवाल कि आपको कविताये कब से लिख रहीं हैँ, के जवाब में उन्होंने हमें बताया कि उन्हें बचपन से ही लिखने का शौक था।
💐मां गंगा 💐
(बाल कविता स्वरूप)
आओ सुनाऊं अपनी जुबानी।
मां गंगा की अमर कहानी।।
विष्णु के चरणों से प्रगति।
ब्रह्मा के कमंडल में आई।।
देवों के देव महादेव के।
जा जटाओं में समाई।।
आओ सुनाऊं अपनी जुबानी।
मां गंगा की अमर कहानी।।
भागीरथ किया युगो युगो तप।
फलस्वरूप गंगा देवभूमि आई।।
झर झर बहती हर दिशा जलधारा।
मंदाकिनी, भागीरथ, नाम कहाई।।
आओ सुनाऊं अपनी जुबानी।
मां गंगा की अमर कहानी।।
साठ हजार श्रापित पुत्रों को।
स्पर्श कर देव लोक पहुंचाई।।
शहर _शहर बसे तीर्थ स्थल।
नदियों में महान मां गंगा कहलाई।।
आओ सुनाऊं अपनी जुबानी।
मां गंगा की अमर कहानी।।
जन्म हुआ हिम,हिमालय से।
अंतिम जा समुद्र में समाई।।
युगो – युगो तक गाए गाथा।
संत, ज्ञानी पुरुष, प्राणी-प्राणी।।
आओ सुनाऊं अपनी जुबानी।
मां गंगा की अमर कहानी।।
(रेखा रतनानी, काव्य लेखिका, नर्मदापुरम)

