
बबलू निरापुरे आमला
आमला. रासायनिक खाद व कीटनाश् ाकों के दुष्परिणाम को देखते हुए अब किसान जैविक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। जैविक खेती में उत्पादन अधिक होने से किसान कम समय में अच्छी कमाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त केंचुआ खाद बनाने में भी किसान अग्रसर हैं। आमला विकासखंड के ग्राम कन्नड़ के किसान राजू हारोड़े ने बताया कि उनके पास 35 एकड़ खेती है और इसमें बेहतर उत्पादन के साथ जैविक खाद का निर्माण कर रहे हैं। इस प्रकार की खेती उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बना रही है। वे स्वयं जैविक खाद का खेत में उपयोग कर रहे हैं और अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। किसान श्री हारोड़े ने अपने खेत में केंचुआ खाद बनाने के लिए यूनिट बनाई है। जिसमें गोबर, कचरा व पानी डालकर केंचुआ खाद तैयार कर रहे हैं। खाद बनाने की इस प्रक्रिया में 45 दिन लगते हैं। एक बार में वह 4 से 5 ट्राली खाद बना लेते है। किसान श्री हारोड़े ने बताया कि वह फसल में जैविक खाद का उपयोग करते हैं। गेहूं, गन्ना और सोयाबीन फसल लगाते है। जैविक खाद से फसल का उत्पादन भी अच्छा होता है और इसमें कम लागत भी लगती है। श्री हारोड़े ने कहा कि अगर सभी किसान अपने खेतों में शत-प्रतिशत जैविक खाद का उपयोग करेंगे तो निश्चित तौर पर अनाज की गुणवत्ता बनी रहेगी और उसे खाने से सेहत पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। रासायनिक खाद के उपयोग से कई तरह की बीमारियां घेर लेती है, जबकि जैविक खाद से तैयार उपज से किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट नहीं होते।

हर साल कमाते है लाखों रूपये ……………..
जैविक खेती से कन्नड़ गांव के राजू हारोड़े ने बताया कि वह सिजनेबल फसल की पैदावर तो करते ही है, साथ ही सब्जियों की खेती भी जैविक पद्धति से करते है। श्री हारोड़े ने बताया कि प्यास, टमाटर, मिर्ची, गाजर, मूली सहित अन्य सब्जियां लगाते है। जिससे प्रतिवर्ष उनकी 5 से 6 लाख रूपये की आमदनी हो जाती है। इसके अलावा गन्ना फसल से भी इतना ही लाभ प्रतिवर्ष कमाते है। श्री हारोड़े का कहना है कि रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है और अधिक खर्च भी लगता है, जबकि जैविक खेती कम खर्च में अच्छा मुनाफा प्रदान करती है।
नुकसान की कम संभावना, पैदावार भी बंपर ………….
कन्नड़ ग्राम के किसान राजू हारोड़े ने बताया कि रासायनिक और जैविक खेती में अंतर बताया है। श्री हारोड़े ने कहा कि जैविक खेती से नुकसान की संभावन कम हो जाती है। इससे फसल की पैदवार तो बढ़ती ही है, साथ ही किसी प्रकार का नुकसान भी मिट्टी को नहीं होता। जबकि रासायनिक खेती से मिट्टी को तो नुकसान होता ही है और रासायनिक खेती से उत्पन्न फसल और सब्जियां मानव शरीर को भी प्रभावित करती है। रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को देखते हुए श्री हारोड़े किसानों को भी शासकीय योजनाओं का लाभ लेते हुए अपनी जमीनों में उन्नत खेती करके लाभ कमाने के लिए प्रोत्साहित करते है।
इनका कहना है –
जैविक खेती के कई फायदे है। इसमें नुकसान की संभावना कम रहती है और उत्पादन भी अधिक होता है। रासायनिक खेती फसलों, मिट्टी और मावन शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए मैं अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करता हूं।
राजू हारोड़े, उन्नत कृषक, कन्नड गांव
