प्रदीप गुप्ता / नर्मदापुरम /(इटारसी) भूखे प्यासे 3 दिन निकालकर फिर 5 दिन की यात्रा कर जब भक्त जगन्नाथ पुरी में अपने ईष्ट भगवान जगन्नाथ के द्वार पर पहुंचा तो भक्तों भारी भीड़ के कारण उसे उस दिन दर्शन भी नहीं हो सके। तब वह दक्षिण द्वार पर स्थित मंदिर के किचिन के करीब चावल के मांड का पानी पीकर ही रात बिताने की बात सभी के मंदिर से जाने के बाद अपनी पत्नी व बच्चे से करता है, तब भगवान खुद एक पंडित का भेष बनाकर दौड़कर भोजन कक्ष में जाते हुए हीरे जवाहरात से भरे एक स्वर्ण थाल को खाली कर उसमें छप्पन भोग सजाकर स्वयं अपने उस भक्त के पास जाते हैं और उसे स्वयं भोजन कराते हैं। बाद में राजा को स्वप्न में आदेश कर उस भक्त को मंदिर का एकाउंटेंट बना देते हैं। तब से आज तक उस भक्त के परिवार के लोग ही श्री जगन्नाथ मंदिर के आय व्यय का लेखा जोखा रखते हैं। ऐसे परम कृपालु हैं जगत के नाथ जगन्नाथ। उक्त कहानी नम आंखों से सुनाते हुए आज रविवार, सुबह 10 बजे से, चतुर्थ दिवस, सम्पूर्ण जगत के नाथ माने जाने वाले भगवान श्री जगन्नाथ की पुरी में होटल नीलाद्री के सभागार में भागवताचार्य पंडित नरेन्द्र तिवारी, हनुमान धाम इटारसी ने प्रभु प्रेम की भक्ति में भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि वास्तव में भगवान दीनता की अंतिम पंक्ति के अंतिम भक्त ह्रदय व्यक्ति से भी अगाध प्रेम करते हैं। श्रीमद भागवत के ध्रुव प्रसंग को विस्तार से अभिव्यक्त कर अन्य कई प्रसंग जैसे प्रहलाद प्रसंग, देवभूति व कर्दम ऋषि के विवाह की कथा, पुत्र कपिल मुनि व नव कन्या रत्न की कथा, श्री राम कथा आदि को सूत्र रूप में बताते हुए, वामन अवतार व श्री कृष्ण जन्म उत्सव कथा प्रसंग, खूबसूरत भजनांजलि के साथ धूमधाम से मनाया गया। दोपहर में इटारसी से पुरी आए लगभग 200 धर्म प्रेमियों ने अपने पितरों की मुक्ति की कामना से तर्पण किया व समुद्र पूजन की। इस ज्ञान यज्ञ के मुख्य यजमान राजेंद्र अग्रवाल, भौरा वाले हैं। सह यजमान प्रोफेसर डा.विनोद सीरिया हैं। अन्य कुछ यजमानों द्वारा भी अपनी तरफ से अलग अलग पंडितों द्वारा पृथक पृथक भागवत कथा का मूल पाठ भी कराया जा रहा है।

