प्रदीप गुप्ता /नर्मदापुरम /ग्राम लोहारिया खुर्द में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में पं. रामेश्वर प्रसाद शर्मा (इटारसी वाले) के द्वारा भगवान के जीवन के रोचक प्रसंग सुना रहे हैं। ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन महाराज जी ने व्यास पीठ से धुंधली चरित्र की कथा सुनाते हुए कहा कि सत्संग, भक्ति और परमपिता परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास हो तो कोई काम कठिन नहीं होता। भक्ति मन को निर्मल कर अच्छे विचारों को उत्पन्न करती है। उन्होंने कहा कि आज हम देखते हैं कि बच्चे छोटी सी उम्र में अपराध करने लगते हैं। यह सब संस्कारों की कमी के कारण होता है। इससे विकृत विचार मन में आते हैं। इसीलिए जन्म से ही बच्चे को सत्संग और अच्छे संस्कार देना चाहिए। मन की निर्मलता से परमात्मा की प्राप्ति सहज में ही हो जाती है। कथावाचक ने कहा कि नारायण की भक्ति में ही परम आनंद मिलता है। उसकी वाणी सागर का मोती बन जाता है। भगवान प्रेम के भूखे हैं। वासनाओं का त्याग करके ही प्रभु से मिलन संभव है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि वासना को वस्त्र की भांति त्याग देना चाहिए। भागवत कथा का जो श्रवण करता है, भगवान का आशीर्वाद बना रहता है। इस दौरान मुख्य यजमान फूल सिंह रघुवंशी एवं समस्त परिवार, समस्त ग्रामवासी लोहारिया खुर्द बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।

