विद्या भारती पूर्व छात्र परिषद ने किया आचार्य दीदी का सम्मान; 70 गुरुजनों का हुआ गरिमामय पूजन I
इटारसी। विद्या भारती पूर्व छात्र परिषद के तत्वावधान में सरस्वती शिशु मंदिर के पूर्व छात्रों द्वारा लगातार 7वें वर्ष “आचार्य दीदी सम्मान समारोह” का गरिमामय आयोजन किया गया। समारोह में विद्यालय से लगभग 20 से 25 वर्ष पूर्व शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने जीवन में शिक्षा एवं संस्कारों का बीजारोपण करने वाले दीदी-आचार्य जी का सम्मान कर गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर आजीवन शिक्षण एवं संस्कार रोपण के लिए “आचार्य गौरव सम्मान 2025” प्रदान किए गए। स्वर्गीय श्री नरेंद्र कुमार दुबे की स्मृति में पूर्व छात्र अवनीन्द्र दुबे द्वारा स्थापित विशेष सम्मान से विद्यालय की सेवानिवृत्त प्राचार्य श्रीमती सुधा वाजपेयी दीदी को सम्मानित किया गया। वहीं घूमर इवेंट्स की ओर से पूर्व छात्र स्वरूप सिंह राजपूत द्वारा श्रीमती सुनीता जैन दीदी को आचार्य गौरव सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यालय की पूर्व छात्रा एवं गुरुनानक स्कूल की प्राचार्य श्रीमती संगीता दुबे उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य श्री वीरेंद्र दीक्षित जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरस्वती शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष श्री अभिषेक तिवारी ने की।
समारोह के दौरान वर्तमान में अध्यापन कार्य कर रहे शिक्षकों के साथ-साथ सेवानिवृत्त एवं पूर्व शिक्षकों सहित लगभग 70 दीदी-आचार्य जी का सम्मान किया गया। पूर्व छात्रों ने कहा कि विद्यालय में प्राप्त शिक्षा के साथ मिले संस्कारों और जीवन मूल्यों में उनके आचार्य दीदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह आयोजन उसी ऋण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक छोटा सा प्रयास है।
कार्यक्रम में पूर्व छात्र लोकेश पटेल, विवेक पगारे, सौरभ दुबे, प्रदीप गौर, साक्षी शर्मा, राधिका चौधरी, राहुल बनर्जी, प्रखर मालवीय, शिरीष सामक, छविराज सोनी, शिवकुमारी पटेल, स्वरूप सिंह राजपूत, सौरभ शर्मा, अंकुर साहू, नीलेश पेठे, श्याम चौधरी, योगेश शुक्ला, रीतेश पटेल, रित्विक सोनी सहित बड़ी संख्या में पूर्व छात्र एवं दीदी-आचार्य जी उपस्थित रहे।
पूर्व छात्रों ने कहा कि आचार्य दीदी का सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उस पूरी गुरु-परंपरा के प्रति कृतज्ञता है, जिसने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ जीवन जीने के संस्कार दिए।

आज का विचार
“गुरु केवल किताबी ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि शिष्य के भीतर जीवन मूल्यों और संस्कारों की नींव रखने वाले मार्गदर्शक होते हैं। गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना अपनी जड़ों से जुड़े रहने का सच्चा प्रतीक है।”
: पत्रकार कुणाल पासवान

