नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता / तवा नगर में दादा जी दरबार मे संगीत मय शिव महापुराण के आज पांचवे दिन भगवान शंकर और पार्वती का विवाह हुआ। कथा को विस्तार देते हुए पण्डित सौरभ दुबे ने राजा हिमानचल और रानी मैना वती के घर मां पार्वती जी के जन्म की कथा में बताया और, मा पार्वती जी ने भगवान शंकर वर्ण करने के लिए कभी बर्फ के बतासे खाकर कभी बेलपत्र कभी सूखे पत्ते खाकर घने जंगलों में, घनघोर तपस्या कर पति रूप में पाया और फिर मां जगदम्बा और भगवान भोले नाथ का विवाह हुआ। पंडित जी ने बेल पत्र के व्रछ की महिमा बताई, कि जो प्रति दिन बेल ब्रछ के नीचे रोज सुबह जल चड़ाते हैं और संध्या को दीपक लगते है उनके घर लक्ष्मी जी की महाकृपा हो जाती हैं।



