नर्मदापुरम / प्रदीप गुप्ता / मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में महंगाई राहत और 32 माह एवं 27 माह के एरियर के संबंध में मुख्य मांगे है। केन्द्रीय पेंशनर्स को देव तिथि से प्रदेश के पेंशनर्स को महंगाई राहत स्वीकृत नही की जा रही है और प्रदेश के पेंशनर्स का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। सरकार व्दारा माह जनवरी 2019 से 12% स्वीकृत राहत राशि पर ही पूरे कोरोना काल तथा सितम्बर 2021 तक पूरे 33 माह 12% राहत पर ही जीवन व्यतीत किया। फिर अक्टूबर 2021 से 5% मई 2022 से 5% और माह अगस्त 2022 से 6% राहत राशि स्वीकृत की है और अभी भी प्रदेश के पेंशनर्स केन्द्रीय पेंशनर्स से 10: कम राहत प्राप्त कर रहे है। इससे स्पष्ट है कि सरकार प्रदेश के पेंशनर्स के प्रति लगातार अन्याय करती जा रही है। सरकार का ध्यान बार-बार आकर्षित करने के बावजूद पेंशनर्स आर्थिक परेशानियां महसूस कर रहे है। अतः हमें जनवरी 2019 के पश्चात माह जुलाई 2019 से 5% जुलाई 2022 तक इसके पश्चात केन्द्रीय पेंशनर्स के अनुरूप राहत राशि दी जाये माह जनवरी 2020 से 21% से 24% जनवरी 2021 से 28 जुलाई 2021 से 31% जनवरी 2022 से 34% और जुलाई 2022 से 38% के एरियर सहित भुगतान की जायें एवं मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ पुर्नगठन 2000 की धारा 49 (6) को विलोपित किया जाये। इन समस्याओं और अन्य मांगों से विद्युत मण्डल पेंशनर्स एसो. नगर पालिक नियम पेंशनर्स एसो. और समान हित वाले सभी दिनांक 01/01/2006 से 31/08/2008 तक 32 माह का ऐरियर उच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 2 मार्च 2020 अनुसार 6% ब्याज सहित भुगतान की जाये तथा रिव्यू पिटीशन या अपील आदि का सहारा नहीं लिया जाये क्योंकि हमारे कई सार्थियों का निधन हो चुका है और जो बचे है वे बहुत ज्यादा आक्रोषित है। अतः 32 माह का ऐरियर सरकार की वचन बद्धता, मंत्री परिषद के निर्णय एवं गजट नोटिफिकेशन के अनुसार निम्नानुसार भुगतान किये जाये। सांतवे वेतन आयोग का 1 जनवरी 2016 से 31/03/ 2018 तक 27 माह के एरियर का भुगतान किया जाये। स्वास्थ्य के मसले पर सरकार गंभीर नहीं है इसलिए रू0 1000/- चिकित्सा भत्ता प्रति पेंशनर्स को प्रतिमाह दिया जाये। प्रदेश के पेंशनर्स को 65 वर्ष के प्रारंभ पर 5 70 पर 10% 75 पर 15% तथा 80 वे वर्ष प्रारंभ पर 20%, 85 पर 30%, 90 पर 40% 95 पर 50% तथा 100 वर्ष के प्रारंभ पर 100% अतिरिक्त पेंशन दी जाये। सरकार पारस्परिक चर्चा के माध्यम से समस्याओं के समाधान पर विश्वास नहीं रखती है। इसलिए आन्दोलन के माध्यम से ध्यान आकर्षित करने का ही विकल्प शेष रहता है। वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम में निहित प्रावधान का सरकार स्वयं पालन नहीं कर रही है।

