सचिव का तुलगकी जवाब, जब जरूरत होगी, तब खोलेगे ताला, 4 सालों में पानी-बिजली की भी व्यवस्था नहीं

सार्वजनिक शौचालय में लटका रहता है ताला, खुले में शौच जाने को मजबूर ग्रामीण
आमला. गांवो को खुले में शौच से मुक्ति का अभियान सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गया है। गांवों में बनाये गये सार्वजनिक शौचालयों में ताला लटक रहा है। सार्वजनिक शौचालयों में न पानी की व्यवस्था की गई है और न ही बिजली है। ऐसे में महिलाएं-पुरूष, बच्चे खुले में शौच को मजबूर है। सबसे खराब स्थिति बोरदेही पंचायत की है, यहां 3-4 साल पहले सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया था। लगभग तीन लाख से बने इस शौचालय में निर्माण के बाद से अब तक पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। शौचालय में ताला लटका होने से ग्रामीण इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे और शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहा। संदीप वाईकर ने बताया कि इसकी शिकायत भी उन्होंने की है, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाही नहीं हुई। शौचालय पर ताला लटका होने से ग्रामीण खुले में शौच को विवश है। गौरलतब रहे कि सरकार द्वारा गांव-गांव में सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया है, ताकि गांवों को खुले में शौच से मुक्त किया जा सके, किन्तु पंचायतों में बने शौचालयों की देखरेख और अव्यवस्थाओं के कारण सार्वजनिक शौचालय सरपंच-सचिवों की अनदेखी का शिकार होकर रह गये है।
पानी की साधन नहीं, केवल कनेक्शन मात्र ………….
बोरदेही पंचायत द्वारा बनाये गये सार्वजनिक शौचालय में बिजली कनेक्शन और पानी के लिए पाइप लाईन तो डाली गई है, लेकिन अब तक पानी की पाइप लाईन को टंकी से जोड़ा नहीं गया। पानी के अभाव में ग्रामीण शौचालय का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे। महिला एवं दिव्यांग प्रसाधन में हमेशा ताला लगा रहता है। जिसके कारण यहां कोई आना नहीं चाहता। वहीं शौचालय का संचालन करने में भी लापरवाही बरती जा रही है। शौचालय की नियमित सफाई नहीं कराई जाती। शौचालय में कोई जरूरी सुविधा नहीं होने के कारण लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और जिम्मेदार भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बने बंद शौचालय ……..
शौचालय में ताला लटका होने से सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ती है। महिलाओं ने बताया कि सार्वजनिक शौचालय में ताला होने की वजह से उन्हें शौच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। दिन के समय खुले में शौच जाने तक के लिए जगह नहीं मिलती है। कभी किसी को पेट दर्द हो रहा है या लघुशंका लगी है तो जगह नहीं मिलती। सरकार का उद्देश्य है कि हर जगह, हर मोहल्ला,हर गांव में शौचालय बनना चाहिए, ताकि लोगों को दिक्कत न हो पर सरकार के आदेश का पालन ही नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत ने शौचालय तो बना दिया, लेकिन ताला लगा है। ऐसा शौचालय बनवाने का क्या फायदा, जब लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते है।
सचिव का तुलकी जवाब, जरूरत रहेगी, तो खोलेगे ताला …
बोरदेही पंचायत के सचिव के इस तुलकी से ग्रामीणों में और भी नाराजगी है कि जब शौचालय की जरूरत होगी, उस समय ताला खोला जायेगा। शिकायतकर्ता संदीप वाईकर कहते है कि शौचालय निर्माण के बाद लोगों को उम्मीद होती है कि शौचालय बना है अभी चले जायेंगे, लेकिन जब जाते हैं तो ताला देखकर लौट जाते हैं। सार्वजानिक शौचालय तो हमेशा खुला होना चाहिए लेकिन वह हमेशा बंद रहता है। पानी की व्यवस्था नहीं है। इससे शौचालय की सुविधा खानापूर्ति बनकर रह गई है। श्री वाईकर का कहना है कि अधिकारियों की उदासीनता से स्वच्छ भारत मिशन की धज्जियां उड़ रही है और ग्रामीण खुले में शौच जाने को मजबूर है।
इनका कहना है …………………………………..
जब जरूरत होगी, ताला खोल दिया जायेगा। पानी के लिए पाइप लाईन डाली थी। थाने की दीवार बनाते समय पाइप लाईन दब गई होगी। मैं इस बारे में जानकारी लेता हूं। नत्थु नागले, सचिव ग्राम पंचायत बोरदेही
