नर्मदापुरम/ प्रदीप गुप्ता/ सत्य प्रताड़ित होता है पराजित नहीं, यह कहावत आज फिर चरितार्थ हो गई। मामला सन 2020 का है जब फरियादी योगेश उर्फ़ रिंकू शर्मा ने बबलू उर्फ़ वीरेंद्र यादव पर लोन दिलाने के नाम से दस्तावेज लेकर उसकी गुमटी का फर्जी विक्रय पत्र बनवाने का केस दर्ज कराया था। लेकिन कोर्ट ने विक्रय पत्र को फर्जी नहीं माना। कोर्ट ने अपने फैसले में बबलू के साथ उसके पिता सुरेश यादव, नोटरी मिर्जा जहीर बैग, अर्पित मालवीय को भी बरी कर दिया। बता दें कि रिंकू शर्मा की पीतल तांबे के बर्तनों की दुकान है और उसके पास गरीबी रेखा मजदूर कार्ड और आयुष्मान कार्ड भी है। रिंकू शर्मा की कोर्ट में सुनवाई के दौरान विरोधाभासी बातों को लेकर कोर्ट ने रिंकू के खिलाफ कलेक्टर एवं एसपी को जांच के आदेश दिए हैं। रिंकू शर्मा का कहना है कि मेरे साहूकारी का लाइसेंस मेरे पिता जी ने बनवाया है। अब इस तथ्यों की भी जांच होगी और आगे जो भी दोषी होगा उस पर भी कार्रवाई होगी।


