परेशान हो रहे स्कूली बच्चे-आमजनता, उबड़-खाबड़ सडक़ पर चलने को मजबूर 
दो माह से बंद कायाकल्प अभियान का सडक़ का निर्माण
आमला. लोग 20 साल से जिस सडक़ के निर्माण का इंतजार कर रहे थे, वह सडक़ स्वीकृत तो हो गई, लेकिन दो महीने से सडक़ का निर्माण कार्य बंद है। जिसके कारण लोगों को, खासकर स्कूली बच्चों को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ध्यान तक नहीं दे रहे। परिणाम स्वरूप वार्डवासियों और स्कूली बच्चों को उबड़-खाबड़ सडक़ पर चलना पड़ रहा है। दरअसल शहर के भीमनगर वार्ड क्रमांक 13 में मुख्यमंत्री कायाकल्प योजनातंर्गत 3 किमी सडक़ का निर्माण होना है। करीब 69 लाख की लागत से बनने वाली इस सडक़ पर अब तक केवल गिट्टी-कांक्रीट का ही काम हुआ है। जबकि सडक़ का टैंडर बारिश के पूर्व हो चुका था। बारिश के पहले ठेकेदार ने पुरानी सडक़ को खोदकर डामर हटाया था। इस वजह से लोगों को लंबे समय तक कीचड़ का भी सामना करना पड़ा। इसे लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई थी, फिर भी सडक़ निर्माण में कोई प्रोग्रेस नहीं हुई। वार्डवासी भरत रावत, नीलेश मालवीय, विनोद यादव कहते है कि इसी तरह सडक़ का निर्माण हुआ तो साल भर में भी सडक़ बनकर तैयार नहीं हो पायेगी और लोगों को खराब सडक़ पर ही आना-जाना पड़ेगा।
उबड-खाबड़ सडक़ से आना-जाना कर रहे बच्चे …………

सडक का निर्माण नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चे की है। बच्चे सडक़ पर नहीं चल पा रहे। जो बच्चे साइकिल या स्कूटी से स्कूल जाते है, वे स्लीप होकर गिर रहे है। जिसके बच्चों को शरीरिक कष्ट और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वार्डवासी योगेश जुंजारे, विजय गांवडे, लक्ष्मण खातरकर का कहना है कि यदि रैनी सीजन में सडक़ का निर्माण नहीं हो सकता था तो पुरानी सडक नहीं खोदा जाना चाहिए था। अब सडक़ पहले की अपेक्षा और खराब हो गई है। अभी सडक़ इस हालत में है कि पैदल भी नहीं चल पा रहे है। जगह-जगह से बड़ी-बड़ी गिट्टी निकल रही है। जिससे चलते समय या वाहन चलाते वक्त गिरने का डर बना रहता है।
जिधर खेत, उधर से बन रही सडक़ ………….

ठेकेदार द्वारा उल्टी दिशा से काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जिस तरफ रहवासी बस्ती है और स्कूल है, उस जगह सडक़ निर्माण को लेकर कोई प्रोग्रेस नजर नहीं आ रही, जबकि दूसरी ओर जहां खेत और मैदान है, वहां से काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जिससे रहवासी क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। भरत रावत, नीलेश मालवीय, विनोद यादव ने बताया कि ठेकेदार द्वारा मोक्षधाम की तरफ से सडक़ बनाने के लिए तैयारी की गई है, वहां कोई नहीं रहता है। मोक्षधाम की तरफ से सडक़ बनते हुए आती है तो रहवासी क्षेत्र तक सडक़ आते-आते समय लग जायेगा। तब तक लोगों को परेशानियों का ही सामना करना पड़ेगा।
निर्माण स्थल पर नहीं डाला मटेरियल ………….
हप्तेभर से बारिश का क्रम थमा है। फिर भी सडक़ निर्माण को लेकर ठेकेदार ने मटेरियल तक नहीं डाला है। इससे लोगों में और भी चिंता बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पैराडाइज स्कूल है। इसके अलावा मोक्षधाम मार्ग होने के कारण शवयात्रा इसी मार्ग से गुजरती है। सडक़ का निर्माण पूरा नहीं होने से सभी लोग परेशान है। कम से कम ठेकेदार मटेरियल लाकर डालते तो यह उम्मीद तो रहती कि सडक़ जल्द बनना शुरू हो जायेगी, लेकिन गिट्टी-कांक्रीट डालकर समतल किये दो महीने का वक्त गुजरने के बाद भी काम में कोई प्रोगे्रस नहीं दिख रही। वार्डवासियों का आरोप है कि नगरपालिका के जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे है, इसी वजह से ठेकेदार भी निर्माण में कोताही बरत रहा है।
इनका कहना है –
मोक्षधाम वाले मार्ग का डामरीकरण होना है। बारिश में डामर का काम नहीं हो सकता, इसलिए काम बंद है। जैसे ही बारिश थमेगी, सडक़ का तेजी से निर्माण कार्य शुरू करवाया जायेगा।
– नीरज श्रीवास्तव, सीएमओ, नगरपालिका आमला
