मावठे की बरसात के बाद अचानक बदला मौसम, बढ़े ठंड के तेवर
स्कूलों के समय में परिवर्तन नहीं, सुबह ठिठुरते पहुंच रहे बच्चे

आमला. बारिश के बाद ठंड ने एकाएक रफ्तार पकड़ ली है। लेकिन शीतलहर के इस कहर से स्कूली बच्चों को कोई राहत नहीं मिली है। बच्चों को सुबह 6 बजे से उठकर स्कूल जाने के लिए तैयार होना पड़ रहा है। बच्चों को ठंड में उठकर नहा-धोकर स्कूल के लिए तैयार होना पडता है। शिक्षा विभाग ने अब तक स्कूल का टाइम बदलने या आगे बढ़ाने की सुध नहीं ली है। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य को ठंड प्रभावित कर सकती है। हालात यह है कि मावठे की बरसात के बाद अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरवट दर्ज की गई है। सर्द हवा ज्यादा बढ़ गई है। रात व सुबह, शाम ही नहीं बल्कि दिन में भी लोग ठिठुर रहे हैं। ऊनी कपडे भी पहनने के लिए मजबूर है। ऐसे में बच्चों को सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाना पड़ रहा है। ज्यादातर स्कूलों के खुलने का समय सुबह 8 बजे है। इसके लिए बच्चों को सुबह जल्दी उठकर तैयार होना पड़ता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले बच्चों को सुबह साढे 5 से 6 बजे उठना पडता है। ऐसे में उन्हें ठिठुरना पड़ता है। हर बार सर्दी में स्कूलों का समय बदल दिया जाता है लेकिन इस बार सर्दी बढ़ गई, लेकिन प्रशासन ने स्कूलों के समय में परिवर्तन करने को लेकर अभी तक कोई निर्देश जारी नहीं किये है।
अधिक ठंड सहना बच्चों के लिए नुकसानदाय …………..
शहर के अधिकांश स्कूलों में मासूम बच्चों के स्कूल का समय सुबह 8 बजे से रहता है। प्राइवेट स्कूलों में इसी तरह की स्थिति है। इसलिए बच्चों को जल्दी तैयार होना पड़ता है। ऐसे में बढ़ती ठंड में जहां वयस्क भी उठने से कतराते हैं, वहीं बच्चों को नहाकर तैयार होना पड़ता है। इधर चिकित्सकों की माने तो ज्यादा ठंड में रहना बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। चिकित्सकों का कहना है कि अत्यधिक ठंड में रहने से बच्चों को नाक, कान, गला रोग या निमोनिया, फेंफड़ों और श्वसन तंत्र पर असर पड़ सकता है। सर्दी, खांसी के साथ दमा जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।
स्कूल समय में बदलाव को लेकर अधिकारी मौन ………….
स्कूलों के समय में बदलाव को लेकर अब तक अधिकारियों ने कोई निर्णय नहीं लिया है। इससे अभिभावक भी ङ्क्षचतित है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल ठंड बढऩे पर स्कूलों के समय में बदलाव या छुट्टी घोषित की जाती है, लेकिन अभी तक प्रशासन द्वारा स्कूलों के समय में परिवर्तन को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किये है। जिसके कारण अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। कुछ अभिभावकों का कहना है कि अचानक मौसम में हुए बदलाव और ठंड के कारण बच्चों की सेहत पर असर पडऩा शुरू हो गया है। बच्चे सर्दी, जुकाम और बीमारी होने लगे है। प्रशासन को स्कूलों के समय में परिवर्तन को लेकर निर्णय लेना चाहिए। वही नगर पालिका भी नगर में अलाव की व्यवस्था नही कर रही है। जिससे लोगो को परेशानी उठानी पड़ रही है।
इनका कहना है ……………..
उच्च अधिकारियों द्वारा समय बदलने का निर्णय लिया जा सकता है जैसे आदेश आएंगे उसके अनुसार ही स्कूलों का समय को बदला जा सकता है।
मनीष धोटे बीआरसी अधिकारी आमला
अभी फिलहाल उतनी ठंड नहीं पड़ रही है दिसंबर माह में कड़ाके की ठंड रहती है अलाव के लिए लकड़ी की व्यवस्था करवाई जाएगी इसके लिए वन विभाग से लकड़ी की खरीदी करेंगे।
नीरज श्रीवास्तव सीएमओ आमला
