यूपी से आकर केमिकल डालकर बनाया जा रहा गुड़ पंचायत से भी नही ली अनुमति,नही दिया जाता कर्मीसियल टेक्स
अनुमति, न अनापत्ति प्रमाण पत्र फिर भी प्रशासन मौन

आमला.ब्लाक के दर्जनों गांवों में दो सैकड़ा से अधिक गुड मिल संचालित है। इन गुड मिल संचालकों के पास न तो पर्यावरण संबंधित कोई अनुमति है और न ही इनके पास जिस पंचायत में उद्योग लगाकर गुड बनाने का कारोबार कर रहे, उस पंचायत का अनापत्ति पत्र लिया है। सबसे खास गुड मिल संचालक बिना मंडी शुल्क चुकाये व्यापार भी कर रहे है। किन्तु प्रशासन द्वारा गुड मिल संचालकों पर कोई कार्रवाही नहीं की जा रही है। यहीं वजह है कि आमला ब्लाक के दर्जनों गांवों में अन्य प्रांत से आकर गुड मिल संचालक बड़े स्तर पर गुड बनाने का काम कर रहे है। इनमें से अधिकांश गुड़ मिल नियम कायदे व मापदंड पर खरा नहीं उतर रहे हैं। ब्लाक के देवगांव मार्ग,कुटखेड़ी,जम्बाड़ा,कोंडरखापा ,गाव में बिना अनुमति के गुड़ मिल संचलित की जा रही है इन गुड मिलों से लगातार निकलने वाला धुंआ पर्यावरण में भी प्रदूषण को बढा रहा है। लेकिन प्रशासन प्रदूषण के मामले में भी कदम उठाने में असफल दिखाई दे रहे हैं, जबकि कई गुड़ मिल संचालक अपने फायदा के लिए खेतों और सार्वजनिक जगहों का मुफ्त में इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बाद भी विभागों द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाही न करना, कई सवालों को जन्म देता है। वही मंडी के अधिकारियों द्वारा गुंड मिलो की जाच नही की जा रही है जिसके कारण शासन को राजस्व की हानि हो रही है।
सडक़ और खेतों में सुखा रहे बगास …………….
आमला ब्लाक के गांवों में करीब दो सैकड़ा से अधिक गुड मिल संचालित है। इन गुड मिल संचालकों द्वारा सडक़ किनारे या खेतों में ही बगास को सूखाने के लिए फैला रखा है। इससे सडक़ पूरी तरह सीमट कर रह गया है। वाहनों के आवागमन के लिए कुछ फिट जगह बच पाती है। जो वाहन चालकों को हादसे का सबब बना हुआ है। सडक़ और सडक़ किनारे फैले बगास में फिसलन होने के कारण जरा सा भी चूक हुई तो वाहन सीधे गिरेगा और अंजाम कुछ भी हो सकता है। दूसरी तरफ बगास के सडऩ से उठने वाले बदबू से ग्रामीण सहित आसपास के खेत में काम करने वाले किसान परेशान हैं।
धुआं में तब्दील हो जाता है गांव ………..
गांव में आबादी के पास ही कई गुड़ मिल संचालित हो रही है, जिसका चिमनी काफी छोटा व ऊंचाई कम है, जिससे चौबीस घंटे काला धुंआ निकलते रहता है। कभी-कभी धुंआ इतनी तेज निकलता है, कि कोहरा सा छा जाता है। इससे लोगों को घुटन महसुस होने लगता है। चिमनी से लगातार निकलने वाले धूंआ से पर्यावरण दूषित हो रहा है। जब हवा चलती है, तो आसपास के घरों में काला धुंआ पहुंच जाता है। जिससे लोग परेशान हो जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल गुड मिल संचालक उनका गन्ना खरीदकर बिना पैसे चुकाये भाग जाते है। अन्य प्रांतों से आने वाले गुड मिल संचालकों का थाने में वैरीफिकेशन तक नहीं रहता है। जिससे बड़ी घटना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
विभागों के पास नहीं समय, शिकायतों पर भी अनदेखी ….
गुड मिलों के संचालन को लेकर विभागीय अधिकारी भी विशेष ध्यान नहीं दे रहे है। नापतोल विभाग न तो इनके कांटों की जांच कर रहा है और न ही गुड मिल संचालकों ने राजस्व, पर्यावरण, प्रदूषण बोर्ड से किसी प्रकार की कोई अनुमति ली है। सबसे खासबात यह है कि इन गुड मिल संचालकों द्वारा गुडों को बेहतर दिखाने के लिए केमिकल्स का भी उपयोग किया जा रहा है, जो मानव शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। किन्तु खाद्य-औषधि विभाग ने भी गुड मिलों पर पहुंचकर गुड बनाने के लिए उपयोग सामग्री की जांच नहीं की। जिससे गुड मिल संचालक बेखौफ होकर केमिकल का उपयोग कर गुड बना रहे है।
इनका कहना है –
मुझे इस संबंध में जानकारी नहीं है। मैं पता करके ही कुछ बता पाऊंगा।
– सुजीत श्रीवास्तव, सीईओ, जनपद पंचायत आमला
समय समय पर गुड़ मिलो की जाच की जाती है बिना मंडी टेक्स चुकाए जो वाहन निकलते है उन पर जुर्माने की कार्यवाही की जाती है
शिला खातरकर सचिव मंडी मुलताई
शिकायत मिली है गुंड मिलो की जाच की जाएगी अगर कोई मिल मालिक केमिकल डालकर गुड़ बना रहे है तो उन पर कार्यवाही की जाएगी
संदीप पाटिल खाद्य अधिकारी बैतुल
