टीकमगढ़। शहर के वैद जैन मंदिर मैं चातुर्मास कर रही 105 सृष्टि भूषण माताजी को जेल अधीक्षक प्रतीक जैन एवं उप अधीक्षक अश्विनी शुक्ल के विशेष आग्रह पर जेल में कैदियों को प्रवचन का लाभ प्राप्त हुआ। अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन जनता ने प्रेस को व्हाट्सएप के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि माता जी ने प्रातः 08 बजे जैन श्रावक एवं माताएं बहनों के साथ जिला जेल पहुंचकर विशेष प्रवचन किए सबसे पहले चित्र अनावरण एवं दीप प्रकाशित जिनवाणी भेंट कर जेल अधीक्षक प्रतीक जैन ने माता जी को श्रीफल भेंट किया। 105 सृष्टि भूषण माताजी ने प्रवचन में कहा की मजबूरी इंसान को सब कुछ सिखा देती है बदला नहीं लेना है खुद ही बदल जाना है जैसे विचार होते हैं वैसी हमारी आकृति बनती है और वैसे ही परिणाम बन जाते हैं गुस्सा एक क्षण का होता है और दंड अनंत होता है अधिकांश ऐसे ही भावुकता में अपराध हो जाते हैं हमें अपने विचारों में सुधार करना है कृष्ण और कंस की राशि एक थी राम और रावण की राशि एक थी लेकिन परिणाम अलग-अलग थे अच्छे काम करो तो नाम होता है वद से वत्तर काम करो तो बदनाम होता है भावावेश में कोई गलती नहीं करना है बारिश नहीं होती है तो फसले खराब हो जाती हैं और आवेश में नस्ले खराब हो जाती हैं पापी पाप से मुक्त हो जाता है तो परमात्मा बन सकता है हमें कंकर नहीं शंकर बनना है हमें अपनी आंखों और जवान पर कंट्रोल रखना है। माताजी के प्रवचनों के दौरान जेल बंदियों सहित जेल स्टाफ एवं जैन समाज के अनेक वरिष्ठ जन मौजूद रहे।

