टीकमगढ़ । बुंदेलखंड में एक कहावत कही जाती है कहा जाता है कि- जिसकी लाठी उसी की भैंस- यह कहावत पूरी तरह से जिसका शासन होता है उसके लिए चरितार्थ होती है भले ही सरकार में ऊपर बैठे नेता जनता के लिए भलाई सोचते हो लेकिन उस सरकार में काम कर रहे कुछेक नेता केवल अपने और अपने स्वार्थ के लिए ही काम करते हैं जहां उन्हें अपने स्वार्थ के सिवाय कुछ नहीं दिखता, जिले में आदिवासियों और हरिजनों की जमीनों को भू माफिया लगातार खरीद रहे हैं और सभी सांठ- गांठ कर आदिवासियों को भूमिहीन बना रहे हैं जिलेभर में ऐसे मामले सुनने और देखने को मिलते आ रहे हैं जिला प्रशासन आदिवासियों और हरिजनों की क्रय कीं गईं जमीनों की अगर फाइलें खोले तो अनेक आदिवासियों और हरिजनों की जमीनों को भू माफियाओं द्वारा हथिया लिया गया है। या तो उनके आका बनकर या उनकीं किसी मजबूरियों को दिखाकर इन जमीनों को खरीदा गया है अगर आदिवासी और हरिजन की जमीनों की क़य हुईं जमीनों की फाइलों को खोला जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। जिला प्रशासन के पिछले कार्यकालों पर नजर डाली जाए तो कई आदिवासियों की जमीनों को खरीदा गया है और उन जमीनों को अवैध तरीके से सांठ-सांठ कर वैध बनाकर खरीदा गया है जो आज भूमिहीन होकर वह आदिवासी और हरिजन दरबदर हो रहे हैं ग्रामीण क्षेत्र के हरिजन और आदिवासियों को लगातार भू माफियाओं द्वारा भूमिहीन किया जा रहा है और उनकी जमीनों को खरीदा जा रहा है। एवं लगातार आदिवासी और हरिजनों को भू माफियाओं द्वारा निशाना बनाया जा रहा है या तो उन्हें उनकी मजबूरी के वक्त कर्ज का लालच देकर या फिर उन पर रोब धौंस जमा कर जमीनें खरीदी जा रही हैं इस तरह के मामले सामने आते हैं जिन पर कोई रोक-टोक भी दिखाई नहीं देती है और इन हरिजन आदिवासियों को भूमिहीन बनाया जा रहा है।

