
आमला से बबलू निरापुरे की रिपोर्ट
आमला. जलावर्धन योजना में घटिया निर्माण एवं मापदण्डों के विपरीत कार्य किये जाने के आरोप लग रहे है। जिसके पीछे एक वजह यह भी है कि जलावर्धन योजना का काम बहुत पहले पूर्ण हो जाना था और इसकी समय सीमा भी निर्धारित थी, किन्तु आज तक भी इस योजना का लाभ शहर वासियों को नहीं मिल रहा है। जिसके परिणाम स्वरूप लोग पेयजल संकट जैसी स्थिति से जुझ रहे है।

रवि चंदेलकर का कहना है कि नियमानुसार पाइप लाइन बिछाने के साथ ही हैड्रोटेस्टिंग होना था, लेकिन जिम्मेदारों ने इसे उस समय गंभीरता से नहीं लिया। समय रहते टेस्टिंग हो जाती तो लीकेज व अन्य तकनीकी समस्याओं सामने आ जाती और तत्काल सुधार किया जा सकता था, लेकिन ठेकेदार ने आमला नगरपालिका के लगभग सभी वार्डो में खुदाई कर पाइपलाइन बिछा दी और मिट्टी डालकर पैक कर सड़क निर्माण कर दिया है। वहीं मोनू पाटिल ने बताया कि पाइप लाइन का लेवल एक जैसा नहीं है। कई जमीन के अंदर एक फीट गहरीकरण तो, कही दो फीट गहराई पर पाइप डाले गये है। पाइप के नीचे बेस भी नहीं डाला गया। किसी तरह की मजबूती नहीं की गई। जिससे की जमीन के अंदर डाली गई पाइप लाइन की सुरक्षा हो सके और टूट-फूट से बचाई जा सके। गड्ढों का लेवल और पाइप का ज्वाइंट भी सही ढंग से नहीं मिलाया गया है। अब हालात यह है कि सडक बनने के बाद टेस्टिंग के दौरान फाल्ट को दुरुस्त करने के लिए दोबारा सडकों को खोदना पड़ रहा है। जिससे लोगों में रोष है। नागरिकों ने काम में हुई लापरवाही की जांच और निर्माण कंपनी पर कार्रवाही की मांग की है।

