नर्मदापुरम / गुरुदेव रवींद्र भारती चौरे कृत नर्मदा पंचकोशी पदयात्रा केन्द्रीय समिति पुनासा , शैव-प्रवासी सम्प्रदाय एवं नर्मदा भक्ति आंदोलन के संयुक्त तत्वावधान में नर्मदापुरम् – बांद्राभान पंचकोशी पदयात्रा, नर्मदापुरम 25 जनवरी से 29 जनवरी 2025 तक आयोजित की जा रही है । इस यात्रा का ये 20 वा वर्ष है । दि. 25 जनवरी, 2025 शनिवार प्रातः काल सेठानी घाट पर नर्मदा स्नान, प्राचीन नर्मदा मंदिर से भक्तों द्वारा ध्वजापूजन एवं आरती पश्चात् प्रस्थान करेगी । मार्ग के मंदिरों के दर्शन करते हुए झारखण्डी आश्रम में भजन / कीर्तन / फलाहार के साथ प्रथम रात्रि विश्राम रहेगा ।
दि. 26 जनवरी, 2025 रविवार नाव द्वारा नर्मदा पार कर यात्रा प्रस्थान करेगी । ग्राम बुधनी (उत्तर द्वार) नर्मदा तट के श्रीरामजानकी / नर्मदा मंदिर में भोजन भण्डारा के बाद द्वितीय रात्रि विश्राम रहेगा ।
दि. 27 जनवरी, 2025 सोमवार प्रातः बुधनी घाट स्नान ध्वजापूजन आरती कर प्रस्थान करेंगी । ग्राम रामनगर (पूर्व द्वार) में भण्डारा, भजन कीर्तन सत्संग के साथ तृतीय रात्रि विश्राम रहेगा ।
दि. 28 जनवरी, 2025 मंगलवार प्रातः नर्मदा स्नान / पितृ तर्पण ओंकारध्वजापूजन कर नाव द्वारा रेवा-तवा से नर्मदा पार करेंगे । दक्षिण बांद्राभान तट स्थित मंदिरों के दर्शन कर विशाल द्वादश शिवलिंग मंदिर एवं शक्तिपीठ आश्रम में भण्डारे के साथ चतुर्थ रात्रि विश्राम रहेगा।
माघ कृष्ण मौनी अमावस्या: दि. 29 जनवरी, 2025 बुधवार प्रातः नर्मदा स्नान ध्वजापूजन / आरती पश्चात् ग्राम मालाखेड़ी से ग्राम नर्मदापुरम् नगर के मुख्य मार्गों से यात्रा सेठानी घाट स्थित नर्मदा मंदिर के सम्मुख ध्वजारोहण के साथ महाआरती / कढ़ावा प्रसादी एवं भण्डारा पश्यात यात्रा का समापन होगा । इस यात्रा के प्रवर्तक ब्रह्मलीन गुरुवर रवीन्द्र चौरे “भारती” रहे है । ॐ कारेश्वर की प्रथम यात्रा से सन 1975 में पंचकोशी यात्राओ की शुरूआत करने वाले नर्मदा पंचकोशी यात्राओ के जनक डॉ. रवींद्र चौरे “भारती” ने अपने जीवनकाल मे 25 नर्मदा पंचकोशी यात्रा शुरू की थी और पंचकोशी यात्रा के दौरान ही पुनासा में ब्रह्मलीन हो गए ।
डॉ. चौरे ने इन स्थानों से शुरू की थी यात्राएं…..
■ नर्मदेश्वर पूर्णश्वर नर्मदा नगर पुनासा (जिला खंडवा)
■ सीतामाता जयंती माता सीतापीपरी बागली (देवास)
■ ममलेश्वर कुबेर भंडारी ओंकारेश्वर (जिला खंडवा)
■ ओकार मांधाता ओकारेश्वर (जिला खंडवा)
■ वाराहेश्वर बड़ा बड़ौदा बाकानेर (जिला धार)
■ कोटेश्वर महादेव राजघाट (जिला बड़वानी)
■ श्री नवग्रह खरगोन (जिला खरगोन)
■ नारद पांडव ढाणा (जिला होशंगाबाद)
■ श्री मां वागेश्वरी सगुर भगुर (जिला खरगोन)
■ नर्मदापुरम सेठानीघाट (जिला नर्मदापुरम )
■ विष्णुपुर शिवपुर भिलाडियां (जिला नर्मदापुरम )
■ सूरजकुंड बांद्राभान (जिला नर्मदापुरम )
■ मनोकामनेश्वर चिचली (जिला खरगोन)
■ वेदेश्वरी कुंडेश्वरी दयालपुरा (जिला खरगोन)
■ सिद्धनाथ नाभि कुंड नेमावर (जिला देवास)
■ रिद्धनाध हंडिया (जिला हरदा)
■ कवेश्वर नर्मदेश्वर रणगांव (जिला खंडवा)
■ बाला मर्दाना कतरगांव (जिला खरगोन)
■ माहिष्मती महेश्वर (जिला खरगोन)
■ श्रीमार्कडेय गालव पिपरिया (जिला नर्मदापुरम )
■ शाली वाहन नावड़ाटोड (जिला खरगोन)
■ गोदबलेश्वर गोदागांव (जिला हरदा)
■ मां विध्यवासिनी सलकनपुर (जिला सीहोर)
■ बिल्वामृतेश्वर धरमपुरी (धार)
■ शूलपाणेश्वर वासला राज पीपला (गुजरात)
डॉ. रवींद्र चौरे “भारती” उज्जैन में विक्रम विश्वविद्यालय में हिंदी के प्राध्यापक थे और यह एक सुखद संयोग है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के माधव विज्ञान महाविद्यालय, उज्जैन में गुरु रहे हैं । आपका स्वर्गवास पंचकोशी यात्रा के दौरान ही पूर्णेश्वर महादेव मंदिर, पुनासा में हुआ था । आपकी स्मृति में नर्मदा भक्तों ने गुरूमन्दिर का निर्माण किया और आपके कार्यो को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ” गुरुदेव डॉ रविंद्र भारती चौरे कृत नर्मदा पंचकोशी पदयात्रा केंद्रीय समिति गुरु स्थान पुनासा” का गठन किया गया । वर्तमान में समिति इकत्तीस यात्राओं का संचालन करती है ।
डॉ. चौरे कहते थे कि पद यात्रा में जितने स्थान देखे जा सकते है वह अन्य किसी भी साधन से मुश्किल होते है । पदयात्रा से स्वाथ्य सुधरता है और मन भी शांत होता है क्योंकि पैदल चलने में व्यक्ति सुकून के साथ चलता है । दुर्गम स्थानों पर अकेले चलना सामान्य व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है पर समूह में भजन कीर्तन करते हुए चलने से कठिनाई महसूस ही नही होती है । इसलिए पंचकोशी का धार्मिक और अध्यात्मिक महत्व के साथ शारीरिक और मानसिक महत्व भी है । मानसिक व्यग्रता में भी पड़यात्रा मन को शांति प्रदान करती है । इसलिए प्राचीन काल से पदयात्रा का महत्व रहा है वो चाहे राम जी या पांडवो का वनवास हो या आदि गुरु शकराचार्य का भारत भ्रमण ।
नर्मदा नदी पहाड़ों जंगलों के बीच में बहती है और नदी के तट पर अनेक ऋषि मुनियों ने तपस्या की थी । इसी वजह से नर्मदा नदी के तट पर अनेक प्राचीन मंदिर एवं आश्रम बने हैं । नर्मदा जी विश्व की एकमात्र नदी है जिसकी बड़ी परिक्रमा होती है । गृहस्थ आश्रम में लंबी परिक्रमा करना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं है इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डॉ. रवींद्र चौरे ” भारती” ने पच्चीस लघु पंचकोशी यात्राओं की शुरुआत की थी।
इस यात्रा में हर वर्ग, जाति और उम्र के लोगो की भागीदारी भागीदारी रहती है । यात्रा में पाया गया है की महिलाओं की भागीदारी पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है । यात्री मार्ग में पढ़ने वाले समस्त मंदिरों, आश्रमों के दर्शन लाभ लेते हुए आरती भजन करते हुए और अलग-अलग स्थान पर पड़ाव डालते हैं । मार्ग में स्थित शहरों के नागरिक और ग्रामीणजन भी सेवा में पीछे नहीं रहते और जगह-जगह चाय, पानी, अल्पहार और भोजन आदि का प्रबंध किया जाता है और विश्राम की व्यवस्था की जाती है । इस तरह पंचकोशी यात्रा अद्भुत अनुभूति प्रदान करने वाली होती है ।
यात्रा संरक्षक पं. सुरेश चौबे ने बताया कि सभी यात्रीगण दिनांक 24 जनवरी, 2025 शुक्रवार की रात्रि तक नर्मदापुरम पहुँच कर धर्मशालाओं में रात्रि विश्राम करेंगे ।
यात्रा के सहयोगी जितेन्द्र भार्गव, शिवसिंह जाट, भोपाली बाबा, देवीसिंह राजपूत, हंसराजजी वर्मा, बालाप्रसादजी गौर , पं. बनवारीलाल शर्मा , रामेश्वर मीणा, परसरामजी पटैल , लाल साहब एवं मलैया आदि ने जानकारी देते हुए बताया कि मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा चाय पान और भंडारे की व्यवस्था की जाती है । यात्रियों से अनुरोध है कि प्रतिदिन आरती में सम्मिलित रहे और व्यवस्था में सहयोग करे ।

