

इटारसी / प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी हज़रत इमाम हुसैन के अनुयायिओ द्वारा करबला के शहीदो को याद करते हुए मौला अब्बास के अलम निकाले जो की नाला मोहल्ला से निकल कर गस्त करते हुए वापस नाला मोहल्ला में इमामबाड़े में रख दिए गए। समाजसेवी आरिफ खान चिश्ती ने बताया की अलम एक प्रकार का ध्वज होता हे, जो की पैगंबर ने अपने भाई मौला अली को दिया था और वही ध्वज मौला अली के बेटे द्वारा उठाया गया, जिसको अलम्बरदार कहा गया। ध्वज को थामने वाला कहा गया हज़रत इमाम हुसैन और उनके परिवार साथियों के शहादत का पर्व मुहर्रम है। जिसमें लाखो मुसलमानो के साथ अन्य धर्मवालियों की आंखे भी नम रहती है, इमाम हुसैन के साथ दहशतगर्द आतंकवादी यज़ीद ने कर्बला में बहुत जुल्म ज्यादती करी और दौरान ऐ नमाज़ जब आप सजदा कर रहे थे तो तलवार से यज़ीद ने शहीद करवा दिया।

