

ग्वालियर / तरूण सिंह अनन्यतः विशेष न्यायाधीश, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम एवं एकादशम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट जिला ग्वालियर द्वारा आरोपी पूरन कुशवाह, आयु- 40 वर्ष, गिरवाई, जिला ग्वालियर को सत्र प्रकरण क्रंमांक 120/2024 धारा-5जे (पप) सहपठित धारा 6 पाॅक्सो अधिनियम 2012 के अधीन आजीवन कारावास व 1,00,000/-रुपए का अर्थदण्ड तथा धारा-506 भाग-2 भा.दसं. के अधीन 1 वर्ष के कठोर कारावास व 1000/-रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया एवं पीडिता व उसके शिशु को 5,00,000 रूपये प्रतिकर एवं सहायता राशि प्रदान करने हेतु आदेशित किया गया है।
अभियोजन की ओर से पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक आशीष राठौर ने प्रकरण की घटना के बारे में बताया कि पीडिता की बुआ की प्रथम सूचना रिपोर्ट दिनांक से लगभग 5 वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई थी तभी से उसका फूफा/आरोपी ग्राम सौजना से अपने तीनों बच्चों को लेकर उनके घर पर रहने के लिए आ गया था। आरोपी उनके घर पर रहकर कारीगरी का काम करता था। प्रथम सूचना रिपोर्ट दिनांक 04.05.2024 से लगभग 3 वर्ष पूर्व पीडिता के माता-पिता एवं बड़ी बहन किसी काम से बाहर चले गए थे तब उसे घर में अकेला देखकर आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती गलत काम किया और उसके विरोध करने पर उसे धमकी दी कि यदि तूने यह बात किसी को बताई तो तेरे माता-पिता एवं भाई-बहन को जान से खत्म कर दूंगा। डर के कारण उसने फूफा की गंदी हरकत के बारे में किसी को नहीं बताया। पूरन कुशवाह उसके साथ जब भी मौका मिलता, उसे पकड़कर गलत काम करता। पीडिता का पेट फूलने के कारण दिनांक 02.05.2024 को उसके परिवार उसे मुरार सरकारी अस्पताल में चिकित्सक के पास ले गए जहां चिकित्सक ने चैक करके बताया कि उसके पेट में 7 माह का गर्भ है। पीडिता की माता एवं चाची के द्वारा उससे जोर देकर पूछे जाने पर उसने पूरी घटना अपने परिवारजन को बताई। पीडिता का आवेदन पत्र थाना गिरवाई में प्रस्तुत कर उक्त घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट लेख कराई जो थाना गिरवाई के अपराध क्रमांक 107/2024 अंतर्गत धारा-376(2)(एन), 376(3), 376(1), 376(2)(एफ), 506 भा.दं.सं. एवं धारा-3/4, 5एल, 5एन, 5जे (पप), 6 लैंगिक अपराधों से बालकों का सरंक्षण अधिनियम 2012 के अधीन आरोपी पूरन कुशवाह के विरूद्ध पंजीबद्ध की गई। विवेचना के दौरान अभियोक्त्री, अभियोक्त्री के माता-पिता, चाची के कथन लेखबद्ध किए गए, अभियोक्त्री एवं उसके बच्चे का आरोपी से डी.एन.ए. मिलान कराया गया जो कि पाॅजिटिव रहा। विचारण के दौरान अभियोक्त्री ने कथन दिये। माननीय न्यायालय ने अभियोजन के तर्काें से सहमत होकर आरोपी को दोषसिद्ध किया गया।

