
नर्मदापुरम / शिवार्चन समिति के तत्वाधान व आचार्य सोमेश परसाई के सान्निध्य में आयोजित महारुद्राभिषेक में नागपंचमी के अवसर पर शिव भक्तों को संबोधित करते हुए गुरुदेव ने कहा कि माँ नर्मदा के मूर्त व अमूर्त दो स्वरूप हैं । हम सब भाग्यशाली हैं क्योकि हम पर जीवनदायनी माँ नर्मदा की प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कृपा बनी हुई है । किन्तु हम सब को इनके संरक्षण हेतु प्रयास करने की आवश्यकता है, मैया को प्रदूषण मुक्ति हेतु प्रयास की आवश्यकता है । शासन प्रशासन नहीं बल्कि हमको जाग्रत होना पड़ेगा तब जा कर हम प्रदुषण रहित नर्मदा मैया के संकल्प को पूर्ण कर सकते है । इसके हमको चाहिए कि हम सब मिलकर संकल्प ले कि कभी साबुन सोडा का उपयोग माँ नर्मदा में नहीं करेंगे ।
आचार्य ने नागपंचमी के महत्त्व बताते हुए कहा कि सत्य सनातन धर्म की विशेषता है कि हम सबका कल्याण सोचते है। सर्प को मारना नही चाहिए ।व्यवहारिक दृष्टि से देखा जाए तो ये किसानों के मित्र भी होते हैं। चूहे आदि फसल खराब करने वाले जीवों से ये फसल की रक्षा करते हैं । आचार्य ने शिव दरबार की व्याख्या करते हुए कहा कि शिव दरबार मे सर्प भी है चूहा भी है मोर भी है बैल भी है तो शेर भी है । ये सभी जीव परस्पर विरोधी है सर्प चूहे को खा जाता है । सर्प को मोर मार देता है । बैल को शेर खा जाता है किंतु भगवान शिव का प्रभाव है कि उनके दरबार में प्रथक प्रकृति के लोग भी अपने परस्पर विरोध को भूल कर प्रेम से रहते हैं । यही सनातन धर्म की विशेषता है । इसके पूर्व गुरुदेव के सान्निध्य में शिव भक्तों ने 1008 रुद्राक्षों से श्रृंगारित भूतभावन भगवान् शिव का रुद्राभिषेक किया । नाना प्रकार के द्रव्यों से भगवान् का स्नान कराया गया । इसके पश्चात रूद्रपाठ द्वारा भगवान् का सतत् जलधारा से अभिषेक किया गया व नाना प्रकार के सुगन्धित पुष्प माला व गुलाल भोडर आदि से भगवान् देवाधिदेव का मनोहारी श्रृंगार किया गया।

