इटारसी : अधिकतर “शिक्षक सम्मान” वर्तमान परिवेश में पैसे कमाने का जरिया बनता जा रहा है इसके लिए सरकार को तत्काल नियमावली बनाकर लगाम लगाने की कार्यवाही करना जरूरी हैं । कुछ स्कूल संगठन तो इवेंट क्रिएटर के रूप में ही कार्य कर रहे हैं । पैसे जमा करके संगठनों के बैनर तले यह कैसा सम्मान? इस प्रकार के सम्मान को देखकर आपकी अंतरात्मा मन में ग्लानि पैदा नहीं होती हैं कि हमारे इस प्रकार के सम्मान प्राप्त करने से समाज में किस प्रकार का संदेश जा रहा है। क्योंकि शिक्षक ही समाज का दर्पण होता है। शिक्षक को चाहिए कि वह इस प्रकार की व्यवसायीकरण की कुरीतियों के विरुद्ध अपनी अलख जगाते रहे। उनका मुख्य धेय्य इस प्रकार के बेलगाम महिमामंडन को रोकने का होना चाहिए। गौरतलब हैं की स्कूल संचालक को भी अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए संगठनों के वास्तविक क्रांतिकारी मूल्यों के प्रति सजग रहना जरूरी हैं न कि इवेंट क्रिएटर के रूप में पैसा इकट्ठा करने का जरिया बनकर अपनी जग हसाई का उदाहरण बने। आये दिन सोशल मीडिया पर शिक्षक सम्मान से लेकर कई सम्मानों की पोस्टों की भरमार है। 3 से 20 हज़ार तक की राशि देकर लुभावने प्रमाण पत्र एवं ट्राफियां देने का लालच दिया जाता है इससे लाखों रुपए की कमाई की जाती है जिसका कोई हिसाब किताब नहीं होता आजकल स्कूलों के संगठन एवं सामाजिक संस्थाओं के संगठन को लगता हैं कि वह अवार्ड देने के लिए ही बने हैं । जो की एक व्यवसाय की श्रेणी में आ गया है सरकार को कर लगाकर इस पर लगाम लगाना अनिवार्य करना चाहिए । कुछ अवार्ड देने वाले संगठनों के साथ-साथ आजकल कुछ मानव अधिकार के संगठन भी नित नए तरीकों से उगाही करने का कार्य कर रहे हैं। आप से मनचाही राशि लेकर जिले से लेकर प्रदेश, राष्ट्रीय स्तर के पद दे देते हैं जो कि आज कल व्यवसाय करने का एक विकृत रूप देखने को मिल रहा है। शासन को चाहिए इन सब बेवजह पैसे उगाही के कार्यों पर लगाम लगा कर अतिशीघ्र कानून बनाएं। क्योंकि कोई भी शिक्षक सम्मान इतना सस्ता नहीं हो सकता कि उसे पैसे में खरीदा जा सके यह शिक्षकों की आस्था आदर और विश्वास का प्रतीक होता है। शिक्षक सम्मान अपने सम्मान देने की अभिलाषाओं की अभिव्यक्ति का सर्वोपरि स्थान होता हैं जो कि गुरु पूजा के साथ ईश्वर पूजा तुल्य होता हैं । आप सभी का कर्तव्य हैं कि इसके तिलक की गरिमा की सजगता को ध्यान मे रखकर इस सम्मान को धूमिल कतई न होने दे।


