प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी कहा गया है। इस स्थिति में अक्षय प्रभु आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं। इस दिन सूर्योदय से चार घड़ी तक के समय को ब्रह्म समय माना गया है। इस समय में आंवले के वृक्ष का पूजन महिलाएं 108 परिक्रमा करती हैं। ॐ अक्षयंम् अक्षय फल दाताय नमः ॐ मंत्र का उच्चारण कर आंवले के पत्रों एवं फलों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से रोगों का शमन होता है, ऐसी मान्यता चली आ रही है और मन में शांति मिलती है, धन में वृद्धि होती है, सुयश प्राप्त होता है।

