प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ माँ ललिता आश्रम में श्रीमद् भागवत महापुराण के सप्तम दिवस में आचार्य पंडित अजय दुबे ने व्यासपीठ से
भगवान श्री कृष्ण के 16108 विवाह की मंगलमय कथा श्रवण कराई साथ ही राजा नृग की कथा पौंड्रक के वध जरासंध का वध युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ की महिमा उस श्रवण कराते हुए भगवान श्री कृष्ण के प्रिय मित्र सुदामा के चरित्र की कथा श्रवण कराई आचार्य जी ने व्यास पीठ से कहा किसी व्यक्ति को अगर आपको जानना हो तो सर्वप्रथम आप उसकी मित्रों को जाने जिसके जैसे मित्र होंगे तदनुसार उसका जीवन व्यतीत होगा। अगर किसी के मित्र अच्छे हैं संगति अच्छी है तो निश्चित ही रूप से उस व्यक्ति का जीवन अच्छा है। मानव जीवन में प्रयास करना चाहिए कि हमारे मित्र बहुत अच्छे मित्र के सुख दुख में हम सदा ही उसके साथ रहे जो मित्र के दुख में दुखी नहीं होते हैं उनको दोष लगता है। उपस्थित श्रोताओं को कहा कि नर से नारायण पद की प्राप्ति का सहज सोपान है। श्रीमद् भागवत यजमान परिवार की उपस्थिति यजमानो ने व्यास पूजन किया । जगमोहन दीवान, श्रीमती प्रभा दीवान, श्रीमती रूपा दीवान, आनंद मोहन दीवान, श्रीमती सरिता दीवान, श्याम मोहन दीवान, निशांत कुमार, श्रीमती दीप्ति, ओम जय विदुषी गरिमा मानसी, निमेष दीवान, ईशान दीवान, वात्सल्य दीवान, निहार , अंजलि, अनुन्जय, शुभ, श्रीमती उषा तिवारी, श्रीमती कुमुदिनी दुबे, आनंद कुमार दुबे, श्रीमती ज्योति सिंह, श्रवण कुमार सिंह सहित अनेकानेक श्रोताओं ने भागवत भगवान का पूजन कर भागवत की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आज कार्तिक मास के पुण्य अवसर पर रविवार को माँ ललिता आश्रम में ब्राह्मण भोजन कन्या भोजन सहित प्रसादी का आयोजन है।
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