प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ नगर के बालागंज क्षेत्र में चल रही संगीत में श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिवस कथा व्यास भागवत आचार्य पंडित सोमनाथ शर्मा ने कथा को ध्रुव चरित्र से प्रारंभ किया और बताया कि जब ध्रुव जी महाराज को ऊंचे पद को प्राप्त करना था तो उन्होंने इस संसार में केवल भगवान से मांगा। क्योंकि इस संसार में भगवान ही है जो मनुष्य को उचित वस्तु प्रदान करते हैं। किस प्रकार देव जी महाराज ने केवल 6 महीने के भजन से भगवान को प्राप्त कर लिया और ध्रुव पद प्राप्त किया। भगवान केवल भाव के भूखे हैं अगर भाव हमारे भीतर हैं तो भगवान हमारे लिए अवश्य आएंगे। श्रीमद्भागवत की कथा भगवान से मिलाने का एक साधन है और यही इस कलि को कलयुग में सरल साधन है जो कि भगवान की प्राप्ति करा सकता है। जिससे प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें ध्रुव लोक में स्थान दिया। आज भी सप्तर्षि उस दुरुपयोग की परिक्रमा करते हैं। ध्रुव जी महाराज ने बताया कि भजन की कोई आयु नहीं होती बालपन में भी अगर चंचलता को त्यागकर भगवान का भजन किया जाए तो वह भगवान मात्र 6 महीने में प्रसन्न होकर दर्शन दे सकते हैं। आगे कथा में उन्होंने का बताया कि किस प्रकार ध्रुव जी महाराज के वंश में आगे महाराज अंग हुए और उनके पुत्र वेन हुए और जिनके शरीर का मंथन करके राजा पृथु और आर्ची देवी प्रकट हुए जिन महाराज पृथु के कारण हमारे इस वसुंधरा का नाम पृथ्वी पड़ा। पंचम स्कंध और छठे स्कंध की सुंदर कथा में राजा प्रियव्रत का चरित्र और छठवें स्कंध में अजामिल उपाख्यान और नाम महिमा का सुंदर वर्णन हुआ कथा के चौथे दिवस नरसिंह चरित्र को सुनकर श्रोता भाव भाव विभोर हो गए और कथा व्यास जी ने यह बताया कि कैसे भगवान अपने भक्तों की प्रतिज्ञा पूर्व पूर्ण करने के लिए खंबे में से भी प्रकट हो जाते हैं और किस प्रकार एक दुष्ट का नाश कर के भक्तों को भगवान आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वामन चरित्र का भी सुंदर वर्णन श्रीमद्भागवत में किया गया और सुंदर स्वरूप को देख कर श्रोता भाव विभोर हो गए। श्रीमद्भागवत के चौथे दिन श्री कृष्ण जन्म उत्सव बड़े उल्लास के साथ मनाया गया। आयोजक श्रीमाली परिवार ने बड़े हर्ष उल्लास से झांकी लगाते हुए सज धज के नंद घर आनंद भयो के साथ भगवान का स्वागत किया। जिसके जयकारे से पूरा पंडाल गूंज उठा। कथा सुनने के लिए नगर भर से भक्तजन अधिक संख्या में उपस्थित हो रहे हैं। कथा के पांचवे दिन कथा में गोवर्धन उत्सव मनाया जाएगा। छप्पन भोग लगाए जाएंगे। कथा का समय प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से 5:00 बजे तक है।

