प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ नगर के बालागंज क्षेत्र में चल रही संगीत में श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस कथा व्यास भागवत आचार्य पंडित सोमनाथ शर्मा ने कथा को प्रारंभ करते हुए गोवर्धन लीला के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए सुनाया कि किस प्रकार भगवान ने भक्तों की रक्षा के लिए 7 को उसके इतने बड़े पर्वत को केवल अपनी सबसे छोटी उंगली के नाखून पर धारण कर लिया था। जिस समय भगवान ने गिरिराज जी को धारण करें और समय भगवान की आयु 7 वर्ष थी और पर्वत भी सात कोस का था और भगवान ने 7 दिन साथ रातों तक उसको उठा रखा इंद्र ने जब अधिक पानी बरसा या फिर भी ब्रज वासियों पर कोई हानि नहीं हुई तो इंद्र समझ गया कि यह बालक नहीं है तो साक्षात भगवान नारायण का ही स्वरूप श्री कृष्ण है इंद्र ने गांव के दूध से भगवान का अभिषेक करके क्षमा मांगी। इस प्रकार गोवर्धन लीला के माध्यम से भगवान ने प्रकृति की रक्षा की है और प्रकृति के महत्व को बताया है कथा के छठवें रास महारास महाराज की सुंदर कथा सुनाई गई और व्यास जी ने कहा कि जीव और परमात्मा का मिलन ही रात है। जिस प्रकार आज के समय में राज को दूसरे ढंग से समझा जाता है। परंतु रास एक बड़ी देवी लीला है और इसे केवल रसिक समझ सकते हैं। इसमें किसी प्रकार का काम का प्रवेश और दोष भाव नहीं है रात में भगवान अपने भक्तों से जब मिलते हैं उसे ही रास कहा जाता है भगवान ने शरद पूर्णिमा की रात्रि पर वृंदावन में यमुना के तट पर गोपियों के साथ किया था जिसको देखने भगवान शंकर भी आए थे आगे भगवान श्री कृष्ण किस प्रकार कंस का वध किया इसे सुनकर सभी भाव विभोर हो गए भगवान श्री कृष्ण रुकमणी जी का हरण करके उनके साथ विवाह किया इस प्रकार का वर्णन किया गया। कथा में रुकमणी मंगल के साथ फूल होली का सुंदर आयोजन हुआ। कथा का आयोजन मालवी परिवार द्वारा कराया जा रहा है कथा का समय 1:00 से 5:00 बजे तक है सुदामा चरित्र कथा विश्राम हो जाएगी कथा का समय सुबह 10:00 से 1:00 बजे तक रहेगा।

