प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/(इटारसी) शहर के श्री द्वारिकाधीश बड़ा मंदिर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें वृंदावन से पधारे आचार्य अनंत दास महाराज द्वारा कथा का वाचन किया जा रहा है। इसलिए प्रतिदिन श्रोताओं की भीड़ उनके दर्शन व भागवत कथा श्रवण करने मंदिर में आ रही है
आज दृतीय दिवस की कथा में महाराज जी ने बताया अगर किसी व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त करना है तो वे भागवत कथा का जरूर श्रवण करें। क्योंकि, श्रवण करने से ही जीवन भक्तिमय बनता है। राजा परीक्षित ने भी सात दिन कथा सुनकर ही मोक्ष को प्राप्त किया और यह भी सत्य है कि सत्संग किसी भी मनुष्य का जीवन बदल देता है। इसीलिए, अगर हमारे जीवन में नित्य सत्संग का नियम बन जाए तो हमारा मन भगवत भक्ति की ओर अग्रसर होगा। समाज में धर्म रक्षा के लिए भक्ति जरूरी है अपने सनातन धर्म को बनाने के लिए भक्ति का सहारा और लोगों में भक्ति का सामंजस्य बना रहे, आपसी भाईचारा बना रहे, लोग एक दूसरे से द्वेष नहीं करें। भागवत कथा का यहीं लक्ष्य है कि लोग आपस में मिलजुल करते हैं। आचार्य ने कहा कि राजा परीक्षित अर्जुन के पोते व अभिमन्यु के पुत्र थे। संसार सागर से पार करने वाली नौका रूपी भागवत का प्रचार इन्हीं द्वारा हुआ। पांडवों ने संसार त्याग करते समय इनका राज्याभिषेक किया था। इन्होंने, नीति के अनुसार पुत्र के समान प्रजा का पालन किया। आचार्य श्री द्वारा यह भी बताया गया की माता पिता से मिले संस्कार को अपने जीवन में उतारे जो व्यक्ति अपने माता पिता के कहे पदचिन्हों पर चलता है। और भागवत कथा में बताए उपदेशों का पालन करता है वह जीवन में सफल होता है।
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