टीकमगढ़। पवित्र तीर्थ क्षेत्र पपौरा जी में आयोजित भव्य श्री पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत आज गर्भ कल्याणक के उत्तर रूप की क्रियाएं श्रद्धा भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुईं। प्रातहकाल से ही श्रद्धालुओं का जनसमूह उमड़ पड़ा जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय हो गया।
इस अवसर पर विराजमान आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कर्ता विषय पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य स्वयं अपने कर्मों का वास्तविक कर्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि जो भी किया जाता है वह नश्वर है और उसका नाश निश्चित है। आचार्य श्री ने आगे कहा कि इस संसार में जो निश्चित है, उसे कोई भी टाल नहीं सकता यहां तक कि भगवान भी सिद्धांत के अनुसार नियति को परिवर्तित नहीं करते।
अपने प्रवचन में उन्होंने विशेष संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को दो भावों का त्याग कर देना चाहिए पहला संसार से बदला लेने की भावना और दूसरा दूसरों को बदलने का प्रयास। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति इन दोनों भावों का त्याग कर देता है तब उसका जीवन शांत सरल और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर हो जाता है।
कार्यक्रम के दौरान विजय तेवरैया परिवार द्वारा पपौरा क्षेत्र में 108 फीट ऊंचे ध्वज का भव्य ध्वजारोहण किया गया जो जैन धर्म की पताका के रूप में आस्था एवं गौरव का प्रतीक बनकर लहराया। वहीं जतारा विधायक हरिशंकर खटीक ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विधायक का सम्मान क्षेत्र के मंत्री पवन जैन द्वारा किया गया।
क्षेत्र समिति के अध्यक्ष सुनील जैन एवं आयोजन समिति के महामंत्री विनय सुनवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि महोत्सव के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें देशभर से श्रद्धालु भाग लेकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं।
लगभग 1200 वर्ष प्राचीन पपौरा जी तीर्थ अपनी समतल भूमि पर स्थित 108 जिन मंदिरों एवं भव्य प्रतिमाओं के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है जो श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। महोत्सव के आगामी कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है।
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