विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के प्रस्तावित सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल प्रांगण में हुआ प्राथमिक विद्यालय एवं छात्रावास भवन का भूमिपूजन*
नर्मदापुरम. से प्रवीण गौर की खास खबर //यह बुदनी के बागवाडा ग्राम में स्थित विद्या भारती मध्यभारत प्रांत के प्रस्तावित सम्राट विक्रमादित्य सैनिक स्कूल प्रांगण में प्राथमिक विद्यालय एवं छात्रावास भवन का भूमिपूजन किया गया, इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में श्री एस. के. सिंह क्षेत्रीय अधिकारी, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण,अध्यक्ष श्री अशोक पाण्डेय मा. प्रांत संघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, मध्यभारत,, विशिष्ट अतिथि – श्री निखिलेश महेश्वरी प्रांत संगठन मंत्री, विद्या भारती मध्यभारत,श्री मोहनलाल गुप्ता अध्यक्ष,सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान म.प्र.,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित सम विचारी संगठन के पदाधिकारी, विद्या भारती संगठन के अधिकारी गण एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। उपस्थित अतिथियों ने वैदिक विधि से मन्त्रोंपचार कर भूमि पूजन किया,भूमि पूजन पश्चात ॐ आकर में निर्मित सैनिक स्कूल एवं प्राथमिक विद्यालय पट का अनावरण माननीय प्रान्त संघ चालक जी द्वारा किया गया।
आज बुदनी विकासखंड में “सम्राट विक्रमदित्य सैनिक स्कूल” के साथ “प्राथमिक विद्यालय एवं छात्रावास” का विधिवत भूमि पूजन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर निखिलेश जी माहेश्वरी ने विद्यालय की विस्तृत जानकारी देते हुए इसकी भूमिका एवं पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि बुदनी विकासखंड में शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार की आवश्यकता को देखते हुए इस क्षेत्र को सैनिक स्कूल के लिए चुना गया है। वर्ष 2030 तक प्रत्येक विकासखंड को कार्ययुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जनजातीय छात्रों के उत्थान हेतु 30 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों का भी विकास किया जा रहा है।
इस सैनिक स्कूल में योग, शारीरिक प्रशिक्षण, राष्ट्रभक्ति निर्माण एवं आध्यात्मिक शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक विद्यालय एवं छात्रावास (द्वितीय चरण) के भूमि पूजन की भी घोषणा की गई। भविष्य में यहां देशभर के विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक विद्यालय भी संचालित किया जाएगा।
विद्यालय की प्रेरणा ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ी हुई है। सम्राट विक्रमादित्य, जिन्होंने शकों का नाश कर राष्ट्र गौरव को स्थापित किया, उनके आदर्शों पर आधारित यह संस्थान विद्यार्थियों में राष्ट्रसेवा की भावना विकसित करेगा।
बताया गया कि यह सैनिक स्कूल 1 अप्रैल 2027 से प्रारंभ होने की संभावना है, जबकि 15 मार्च 2027 तक इसके लोकार्पण का लक्ष्य रखा गया है। विद्या भारती द्वारा देशभर में संचालित 14 सैनिक स्कूलों की श्रृंखला में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी होगा। यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र देश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
भूमि पूजन कार्यक्रम के अवसर पर प्रांत संघ चालक अशोक जी पांडे ने अपने उद्बोधन में राष्ट्र निर्माण, संस्कार एवं कर्तव्यबोध के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बीते लगभग 1000 वर्षों में समाज कई बार पतन (रसातल), अहंकार एवं विकृतियों का शिकार हुआ, जिसका एक प्रमुख कारण सही नेतृत्व एवं प्रबल राष्ट्रभक्ति भावना का अभाव रहा। आज आवश्यकता है कि हम कर्तव्य के स्तर पर अधिकारवाद से ऊपर उठें और संकल्प लें कि देशभक्ति से ओत-प्रोत संस्कारित नागरिक तैयार हों, देश के प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना होना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे शिक्षण संस्थान, जहाँ बालकों में बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और सेवा के संस्कार विकसित हों, राष्ट्र के भविष्य को मजबूत बनाते हैं। यहां से निकलने वाले विद्यार्थी केवल अपने लिए नहीं, बल्कि देश के लिए “सम्पत्ति” सिद्ध होंगे।
उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान में अधिकांश विद्यार्थी केवल अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए शिक्षा ग्रहण करते हैं, जबकि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य राष्ट्र सेवा होना चाहिए। शरीर, मन और बुद्धि – तीनों का समन्वित विकास आवश्यक है।
उन्होंने महान शिक्षाविद् पंडित मदन मोहन मालवीय का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए समाज से भूमि एवं सहयोग जुटाया और उसे राष्ट्र को समर्पित किया। इसी प्रकार भामाशाह जैसे दानवीरों और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जैसे महान व्यक्तित्वों ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व अर्पित किया। हमें ऐसे शिक्षण एवं संस्कार केंद्र विकसित करने होंगे, जहाँ से निकलने वाले विद्यार्थी भारत माता के प्रति पूर्णतः समर्पित होकर राष्ट्र सेवा में अग्रणी भूमिका निभाएं।
भूमि पूजन कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय अधिकारी एस. के. सिंह ने अपने विचार रखते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
उन्होंने कहा कि विद्यालय में प्रारंभ से ही सड़क सुरक्षा (Road Safety) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली जैसे महानगरों में बच्चे सड़क सुरक्षा के प्रति काफी जागरूक (aware) हैं, जिससे दुर्घटनाओं में कमी लाने में मदद मिलती है।
एस.के. सिंह ने कहा कि यह एक सुखद संयोग है कि विद्यालय के साथ-साथ क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) का निर्माण भी हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को यातायात नियमों, सुरक्षा उपायों और जिम्मेदार नागरिक बनने की शिक्षा देना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बच्चों को प्रारंभ से ही सड़क सुरक्षा के संस्कार दिए जाएं, तो वे भविष्य में स्वयं सुरक्षित रहेंगे और समाज में भी जागरूकता फैलाने का कार्य करेंगे।
अंत में उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से आग्रह किया कि शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक जीवन से जुड़े विषयों को भी प्राथमिकता दी जाए, जिससे विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
अंत में प्रादेशिक सचिव शिरोमणि दुबे ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि –
“जिसको देखा नहीं, उसकी सूरत क्या होगी,
हे मातृभूमि तेरी सूरत क्या भगवान से कम होगी।”
उन्होंने कहा कि विद्या भारती जैसे संस्थानों से देश में अच्छे डॉक्टर, आर्किटेक्ट, इंजीनियर एवं प्रशासनिक अधिकारी (IAS, IPS) तो बन रहे हैं, आज सबसे अधिक आवश्यकता ऐसे चरित्रवान, शीलवान और राष्ट्रनिष्ठ युवाओं की है, जो देश की सीमाओं की रक्षा कर सकें और राष्ट्र के लिए समर्पित जीवन जी सकें।
उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 110 करोड़ से अधिक जनसंख्या होने के बावजूद हम मानसिक रूप से कई बार कमजोर दिखाई देते हैं। आवश्यकता है कि हर घर से ऐसे युवा निकलें, जो आत्मविलोपित न होकर राष्ट्र के लिए जीने वाले हों।
उन्होंने आह्वान करते हुए कहा –
“देशभक्ति का ज्वार कभी रुकना नहीं चाहिए,
जिस-जिस में शक्ति हो, वह राष्ट्र के लिए आगे आए।”
शिरोमणि दुबे ने बताया कि इस विद्यालय का निर्माण कार्य जा रहा है, जहाँ निर्धारित चयन प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 800 छात्र-छात्राएं अध्ययन कर सकेंगे। यहाँ बालकों के साथ-साथ छात्राओं को भी समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों का बौद्धिक, शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास करते हुए उन्हें विवेकशील, संस्कारित एवं राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनाना है।
अंत में उन्होंने पुनः सभी अतिथियों, आयोजकों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी को धन्यवाद दिया।
