नर्मदापुरम में “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत डिजिटल रूप से सुरक्षित होंगी प्राचीन पाण्डुलिपियां: कलेक्टर सोमेश मिश्रा की अपील l
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी: कलेक्टर
नर्मदापुरम।मठ-मंदिरों के साथ-साथ घरों और संस्थानों में सहेजकर रखी गई प्राचीन पाण्डुलिपियां हमारी सांस्कृतिक स्मृतियों, ज्ञान, विज्ञान और दर्शन का अनमोल खजाना हैं। इन्हें सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह बात नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर शुरू हुए “ज्ञान भारतम् मिशन” की रूपरेखा बताते हुए कही।
कलेक्टर श्री मिश्रा ने जानकारी दी कि इस राष्ट्रीय अभियान के तहत वर्ष 1950 से पूर्व की सभी पाण्डुलिपियों का डिजिटल माध्यम से संरक्षण किया जा रहा है।
ताड़पत्र, ताम्रपत्र और भोजपत्र पर अंकित ज्ञान का होगा दस्तावेजीकरण
कलेक्टर ने बताया कि हमारे क्षेत्र के मंदिरों, मठों, आश्रमों, पुस्तकालयों, शोध संस्थानों और यहाँ तक कि कई परिवारों के पास ताड़पत्र, ताम्रपत्र, प्रस्तर, भोजपत्र एवं पोथियों के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां उपलब्ध हैं। मध्य प्रदेश ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद समृद्ध है। भारत की इस गौरवशाली ज्ञान परंपरा को जीवित रखने के लिए जनसहभागिता सबसे जरूरी है, जिसके लिए नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है।
जिला स्तर पर समिति गठित, “ज्ञान भारतम्” ऐप से होगा सर्वे
पाण्डुलिपियों के प्रभावी संरक्षण के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है।
- डिजिटल सर्वे: समिति द्वारा “ज्ञान भारतम्” मोबाइल ऐप के माध्यम से पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण और उन्हें अपलोड करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
- प्रतिनिधियों की नियुक्ति: इस मिशन के लिए भारत सरकार और प्रदेश के पुरातत्व विभाग द्वारा जिले में नोडल प्रतिनिधि नियुक्त किए गए हैं।
- अधिकारियों को निर्देश: कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे पाण्डुलिपि धारकों से सीधा संपर्क करें और शैक्षणिक संस्थानों व शोधार्थियों को इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ें।
जिला प्रशासन की नागरिकों से अपील
जिला प्रशासन ने नर्मदापुरम के समस्त नागरिकों, इतिहासकारों और संस्थाओं से अपील की है कि यदि उनके पास कोई भी हस्तलिखित पाण्डुलिपि, ऐतिहासिक दस्तावेज या पुरातन अभिलेख सुरक्षित है, तो उसे डिजिटल स्वरूप देने में सहयोग करें। इन दस्तावेजों को सरकार के निर्धारित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से “ज्ञान भारतम पोर्टल” पर अपलोड किया जा सकता है।
आज का विचार: “संस्कृति और इतिहास की जड़ें जितनी गहरी होंगी, भविष्य की बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी।”
— पत्रकार कुनाल पासवान

