प्रदीप गुप्ता/ नर्मदापुरम/ (माखन नगर) इस जगत में दो से ही सच्चे सम्बंध होते हैं पहला सम्बंध अपनी माँ से और दूसरा परमपिता परमात्मा से जिनमें कोई स्वार्थ नहीं होता । यह बात स्व.प्रहलादसिंह सोलंकी की स्मृति में श्रीमती पार्वती सोलंकी द्वारा ग्राम सनखेड़ा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा वाचक पं.आशीष दुबे ने पांचवें दिन व्यास गादी से कही। आगे उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे ही प्रकृति है और जल ही जीवन है, इसलिए प्रकृति की रक्षा और नदियों की स्वछता दोनों ही हमारा धर्म है । उन्होंने कहा कि संत और शेर की पहचान केवल उसके शब्दों से होती है, जिस तरह शेर की दहाड़ से जंगल के अन्य जानवर भाग जाते है उसी तरह सद्गुरु की वांणी से मानव के सारे विकार दूर हो जाते हैं । मानव की इच्छा कभी पूरी नहीं होती राजा रावण की भी सोने में सुगंध व स्वर्ग मे सीड़ी लगाने की दो इच्छा अधूरी रही । इस धार्मिक अनुष्ठान में जिले भर के सैंकड़ों महिला पुरूष ने शामिल हो कथा श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित किया ।

