स्वतंत्रता के 79 वर्ष: गौरव से संकल्प और विकसित भारत की ओर
नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा का विशेष संपादकीय: ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ता देश I
इटारसी | 15 अगस्त हमारे राष्ट्रीय जीवन का वह पावन दिवस है, जब भारत ने सदियों की पराधीनता की बेड़ियां तोड़कर स्वतंत्रता के खुले आकाश में एक नई यात्रा का शुभारंभ किया था। स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर नर्मदापुरम के कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा ने एक विशेष संपादकीय के माध्यम से देश और जिले की गौरवशाली यात्रा, उपलब्धियों और ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साझा किया है।
संघर्षों से वैश्विक शक्ति बनने तक का सफर
कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने कहा कि 15 अगस्त 1947 केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा के पुनर्जागरण और स्वाभिमान का दिन था। स्वतंत्रता के समय देश के सामने गरीबी, भुखमरी, अशिक्षा और सीमित संसाधनों जैसी विकराल चुनौतियाँ थीं। लेकिन भारत की वास्तविक शक्ति उसके नागरिकों के संकल्प, श्रम और अदम्य इच्छाशक्ति में थी।
आज 79 वर्षों के बाद:
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खाद्यान्न सुरक्षा: खाद्यान्न संकट से उबरकर भारत आज कृषि उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर है।
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वैज्ञानिक व तकनीकी प्रगति: IIT, IIM, AIIMS, ISRO, DRDO और ICMR जैसे संस्थानों ने वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है।
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अंतरिक्ष व स्वास्थ्य: चंद्रयान-3 की सफलता और कोविड-19 काल में दुनिया भर में वैक्सीन व चिकित्सा सहायता पहुँचाकर भारत ने अपनी क्षमता साबित की।
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आर्थिक मजबूती: भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से उभर रहा है।
संप्रभुता, सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्य
संपादकीय में रेखांकित किया गया कि राष्ट्र की प्रगति के साथ उसकी सीमा सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आतंकवाद के विरुद्ध भारत की निर्णायक कार्रवाई यह संदेश देती है कि देश विकास और सहअस्तित्व का पक्षधर है, लेकिन अपनी सुरक्षा और सम्मान से कोई समझौता नहीं कर सकता।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पहला वाक्य—“हम, भारत के लोग”—हमारी लोकतांत्रिक शक्ति का सबसे बड़ा उद्घोष है, जो याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण प्रत्येक नागरिक के योगदान से ही पूर्ण होता है।
नर्मदापुरम: प्रकृति, संस्कृति और विकास का अद्भुत संगम
नर्मदापुरम जिले का उल्लेख करते हुए कलेक्टर ने कहा कि माँ नर्मदा के पावन तट पर बसा यह जिला प्राकृतिक संपदा, सघन वनों, कृषि और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
“नर्मदापुरम में विकास और प्रकृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। माँ नर्मदा केवल हमारी आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था और जीवन की आधारधारा भी हैं। इसलिए विकास की हर पहल में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”
लक्ष्य 2047: ‘विकसित भारत’ का निर्माण
कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने आह्वान किया कि स्वतंत्रता के 79 वर्षों की उपलब्धियाँ हमारा गौरव हैं, लेकिन हमें यहाँ रुकना नहीं है। हमारा अगला बड़ा लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है।
विकसित भारत की आधारशिला:
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समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाना।
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महिलाओं का सशक्तिकरण और युवाओं की प्रतिभा को अवसर देना।
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किसानों की समृद्धि और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं।
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अधिकारों के साथ-साथ नागरिक कर्तव्यों (पर्यावरण रक्षा, सामाजिक सद्भाव, कानून का पालन) का निष्ठापूर्वक निर्वहन।
आज का विचार
“भारत की स्वतंत्रता हमारी विरासत है, उपलब्धियां हमारा गौरव हैं और विकसित भारत हमारा संकल्प।
जब नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन निष्ठा से करते हैं, तभी एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण होता है।”
रिपोर्ट: पत्रकार कुणाल पासवान

