यातायात पुलिस द्वारा चैकिंग अभियान चलाकर मात्र खानापूर्ति करते हुए केवल वाहन चालक तथा वाहन के दस्तावेज को देखा जाता है। विभाग काे वाहन की हालत से कोई मतलब नहीं है। चाहे वाहन में अतिरिक्त उपकरण लगाए गए हों या फिर किसी आवश्यक उपकरण या सामान की कमी हो इससे कोई सरोकार नहीं है। अब शहर में भारी तथा तिपहिया वाहनों को ही देंखें तो इनमें हमें प्रेशर हॉर्न और अतिरिक्त लाइटों देखने को मिलती है जिनसे आम रहगीर, अन्य वाहन चालक तो ठीक नगर के वाशिंदें भी खासे परेशान बने हुए हैं। शहर में दो पहिया वाहनों की चेकिंग लगाई जाती है। इस दौरान यातायात कर्मी दस्तावेज तो चेक करते हैं, लेकिन बाइक में अन्य अतिरिक्त सामग्री पर ध्यान नहीं दिया जाता है, जिसमें एक की जगह तीन-तीन लाइटें लगी होती। वैसे ही आटो में दो की जगह छह-छह लाइटें लगाईं जाती हैं। हेडलाइट के अलावा अतिरिक्त एलईडी लगे होने के कारण सामने से आ रहे वाहन चालकों को काफी परेशानियां होती हैं। कुल मिलाकर शहर की यातायात व्यवस्था चौपट है। वहीं तिपहिया वाहन चालक क्षमता से अधिक सामान लादकर अपनी तथा अपनी सवारियों सहित आम जनमानस की जान जोखिम में डालते रहते हैं।
जाम की स्थिति निपटने कोई रूपरेखा नहीं : शहर में जहां मन किया वहीं आटो खड़ा कर दिया। एक मिनट के ठहराव की तो बात ही नहीं रही। चारों तरफ की सड़कों पर आटो खड़े रहते है। इन सब नजारों को यातायात पुलिस देखती भी रहती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है। यातायात पुलिस को यातायात का पालन कराने के लिए ही निर्धारित किया गया है। नियमों का हो पालन, तब सुधरे व्यवस्था। यातायात के नियमों का पालन यदि यातायात पुलिस द्वारा शहर के ऑटो चालकों को कराया जाए, तो शहर की यातायात व्यवस्था सुधर सकती है। पैदल चल रहे राहगीरों को आवाज लगाते हुए बीच सड़क ही आटो चालक आटो खड़ा कर देते है, जिससे घंटों के लिए जाम लग जाता है। गौरतलब है कि ट्रैफिक प्रभारी शहर के यातायात को लेकर बिलकुल भी संजीदा नहीं है और न ही वह इसे दुरुस्त कर पा रहे हैं। चालानी कार्रवाई करने के बाद राजस्व बढ़ाने में पुलिसकर्मी जुटे हुए हैं, जबकि व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गईं हैं। निर्धारित ट्रैफिक प्वाइंट से यातायात कर्मी गायब भी रहते है। इस बात की जानकारी अधिकारियों को होने के बाद भी वह चुप्पी साधे हुए है। पुलिसकर्मी शहर में कहीं भी चौराहों पर नजर नहीं आते हैं। अस्पताल चौराहे पर फुटपाथ पर ही वाहन खड़े होते हैं। इससे जाम की स्थिति निर्मित होती है।
जगह-जगह थमते है पहिए: विभिन्ना क्षेत्रों के लिए रवाना होने वाली बसे कदम-कदम पर थमती है। बस स्टैंड से चलने के बाद बसें बस स्टाप पर न रुककर सवारी ने जहां रुका। वहीं ब्रेक लग जाता है। ऐसे में पीछे से वाहनों की लंबी कतारें भी लग जाती है। ऐसे में हालातों को देखकर भी यातायात पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। ओरछा रोड, ललितपुर रोड, सागर रोड, छतरपुर रोड सहित शहर की विभिन्ना सड़कों पर जाम की स्थिति बनी है। यहां इस व्यवस्था को दुरूस्त करने केवल कागजों में प्लानिंग होती रहती है जो कभी जमीनी तौर पर लागू नहीं हो पाती है। नगर में कुछ मार्गोँ पर वाहनों के स्टॉपर के रूप में ड्रम रखे गए थे पर आज इन ड्रमों की हालत बेकार बनी हुई है कहीं कहीं तो यह गायब है और अगर कहीं है भी तो जीर्णशीर्ण हालत में कुचल पड़े हुए हैं।कुछ वर्ष पहले नगर की ट्रैफिक व्यवस्था बहुत ही बढ़िया था लेिकन कई महिनों ने इस व्यवस्था को चौपट करके रख दिया है। ट्रैफिक पुलिस कई जरूरी कदम उठाती है लेकिन सब धरा का धरा रह जाता है।
क्या कहते हैं अधिकारी : कमियों पर ध्यान दिया जाएगा और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार किया जाएगा । – कैलाश पटेल, यातायात प्रभारी, टीकमगढ़

