माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या (या माघी अमावस्या) कहा जाता है। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन ‘मौन’ रहने और पवित्र नदियों में स्नान करने का विधान है।
आज, 18 जनवरी 2026 (रविवार) को ही मौनी अमावस्या मनाई जा रही है। रविवार के दिन होने के कारण इसे ‘रवि-मौनी अमावस्या’ कहा जाता है, जो एक बहुत ही शुभ संयोग माना जाता है।
1. शुभ मुहूर्त (2026)
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 18 जनवरी, रविवार को रात 12:03 बजे से।
अमावस्या तिथि समाप्त: 19 जनवरी, सोमवार को रात 01:21 बजे तक।
स्नान-दान का समय: सुबह 05:27 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक सबसे उत्तम है।
विशेष योग: आज सर्वार्थ सिद्धि योग (सुबह 10:14 से अगले दिन तक) भी बन रहा है।
2. मौनी अमावस्या का महत्व
मौन का महत्व: ‘मौनी’ शब्द ‘मुनि’ से बना है। माना जाता है कि इस दिन चुप रहकर (मौन व्रत) मन को अंतर्मुखी किया जाता है। इससे मानसिक शक्ति और आत्मबल बढ़ता है।
पवित्र स्नान: पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन गंगा और अन्य पवित्र नदियों का जल ‘अमृत’ के समान हो जाता है। प्रयागराज के संगम में इस दिन का स्नान सबसे फलदायी माना जाता है।
पितृ तर्पण: यह दिन पितरों (पूर्वजों) को समर्पित है। इस दिन उनके नाम पर दान और तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
ऋषि मनु का जन्म: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन जैन धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने अपना मौन तोड़ा था और इसी दिन ऋषि मनु का जन्म भी माना जाता है।
3. इस दिन क्या करें? (पूजा विधि)
जल्दी उठें: सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। यदि नदी पर जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
मौन व्रत: संभव हो तो पूरे दिन या कम से कम स्नान और पूजा के दौरान मौन रहें।
अर्ध्य: तांबे के लोटे में जल, काले तिल और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्ध्य दें।
दान-पुण्य: स्नान के बाद तिल, गुड़, कंबल, घी या अन्न का दान करना अत्यंत शुभ होता है।
पीपल पूजा: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं और परिक्रमा करें।
4. व्रत कथा (संक्षेप में)
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, कांचीपुरी के ब्राह्मण देवस्वामी की पुत्री गुणवती की कुंडली में वैधव्य योग था। इसे दूर करने के लिए उसने सोमा धोबिन की सेवा की और मौनी अमावस्या के दिन विधि-विधान से पीपल की पूजा की। इसके फलस्वरूप उसे अखंड सौभाग्य का वरदान मिला और उसके पति के जीवन की रक्षा हुई।
आज के दिन घर पर इस विधि से पूजा करें:
- संकल्प: सुबह स्नान के बाद हाथ में जल लेकर मौन रहने और दान करने का संकल्प लें।
- सूर्य देव की पूजा: तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें काले तिल डालकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
- विष्णु पूजा: भगवान विष्णु या श्री कृष्ण की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं, उन्हें पीले फूल और तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) अर्पित करें।
- मंत्र जप: मौन रहकर मन ही मन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करें।
- दीपदान: शाम के समय तुलसी के पौधे के पास और घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं।
3. पितृ दोष के लिए विशेष उपाय
अगर कुंडली में पितृ दोष है या जीवन में बाधाएं आ रही हैं, तो आज यह जरूर करें:
- दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों के नाम से जल में काले तिल डालकर तर्पण करें।
- पीपल के पेड़ पर मीठा जल (दूध और चीनी मिला हुआ) चढ़ाएं।
- चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा और मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं।
4. आज क्या न करें? (सावधानियां)
- आज के दिन किसी से वाद-विवाद न करें और न ही झूठ बोलें।
- तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा) से पूरी तरह परहेज करें।
- देर सुबह तक न सोएं; सूर्योदय से पहले उठना ही इस दिन का मुख्य नियम है।
पत्रकार -कुणाल पासवान
मो.-7581988260


