टीकमगढ़। पपौरा जी जैन तीर्थ में आयोजित श्री पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत भगवान के तप, त्याग एवं लोककल्याणकारी जीवन प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। पूरे आयोजन में आध्यात्मिकता, भक्ति और धर्ममय वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ अर्जित करते नजर आए।
भगवान ऋषभदेव के उपदेशों का विस्तृत वर्णन
महोत्सव के दौरान प्रतिष्ठाचार्य पंडित बाल ब्रह्मचारी जय निशांत जी ने भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ भगवान) के जीवन दर्शन को विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि आदिकाल में जब मानव असभ्य और असंगठित जीवन व्यतीत कर रहा था, तब भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को सभ्यता और संगठन का मार्ग दिखाया।
उन्होंने जीवन के तीन प्रमुख आधार—असि, मसि और कृषि—का महत्व समझाते हुए कहा:
असि: रक्षा और व्यवस्था का प्रतीक, जिससे समाज में न्याय और सुरक्षा बनी रहती है।
मसि: ज्ञान, शिक्षा और लेखन का आधार, जिससे विवेक और संस्कृति का विकास होता है।
कृषि: आत्मनिर्भरता का माध्यम, जिससे मनुष्य अपने जीवन का निर्वाह करता है।
उन्होंने कहा कि ये उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और समाज में संतुलन व समृद्धि का आधार हैं।
मानव सेवा और अहिंसा पर दिया विशेष जोर
इस अवसर पर पट्टाचार्य 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने मानव सेवा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि किसी भी पीड़ित की सहायता करना ही सच्चा धर्म है। उन्होंने कहा कि यदि किसी जरूरतमंद की मदद के लिए अपने कार्यों में विलंब भी हो जाए, तो उसे सहर्ष स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने दया, करुणा और अहिंसा को धर्म का मूल बताते हुए कहा कि मन, वचन और काया से अहिंसा का पालन करना आवश्यक है, क्योंकि भाव हिंसा भी कर्म बंधन का कारण बनती है।
नीलांजना नृत्य ने किया भावविभोर
महोत्सव के अंतर्गत नीलांजना का मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्य के मध्य नीलांजना की अचानक मृत्यु का दृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को गंभीर और चिंतनशील बना दिया।
यह प्रसंग जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाता हुआ सभी को गहन चिंतन के लिए प्रेरित कर गया।
आदिकुमार में जागा वैराग्य भाव
नीलांजना प्रसंग को देखकर आदिकुमार के अंतर्मन में वैराग्य भाव जागृत हुआ। उन्होंने संसार की नश्वरता को समझते हुए त्याग और तप के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
राजसी वैभव और सुख-सुविधाओं को त्यागकर आदिकुमार का तप के लिए प्रस्थान अत्यंत भावुक दृश्य रहा। संगीत, मंगल ध्वनि और जयकारों के बीच यह भव्य प्रस्थान हुआ, जिसने श्रद्धालुओं की आंखों को नम कर दिया।
जनप्रतिनिधियों ने लिया आशीर्वाद
आज के कार्यक्रम में टीकमगढ़ विधायक माननीय श्री यादवेंद्र सिंह, पूर्व विधायक श्री अजय यादव एवं पूर्व विधायक श्री राकेश गिरी गोस्वामी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती लक्ष्मी गिरी के साथ उपस्थित रहे। सभी ने गुरुचरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर समिति के सदस्य—सुनील जैन (प्रेस), विजय तेवरैया, विनय सुनवाहा, पुष्पेंद्र केशवगढ़, अरुण सुनवाहा, पवन सतभैया, अनोज जैन, अभय तेवरैया, पवन धोर्रा एवं उत्तम जैन सहित अन्य सदस्यों द्वारा अतिथियों का सम्मान किया गया।
संयम और साधना का दिया संदेश
आदिकुमार के तप प्रस्थान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्चा सुख भौतिक संसाधनों में नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, संयम और साधना में निहित है। यह प्रसंग प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में त्याग और अनुशासन अपनाने की प्रेरणा देता है।
धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम का संचालन संजीव कुमकुम द्वारा किया गया। अंत में श्रद्धालुओं ने भगवान ऋषभदेव के उपदेशों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। संपूर्ण आयोजन भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
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