टीकमगढ़। ग्रामीण बैंक पेंशनर्स वेलफेयर समिति द्वारा रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि श्री एन.एल. योगी ने पेंशनर्स और कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारी प्रमोद कुमार वाजपेई, लखन राजपूत, नसीम सिद्दकी, यू.एस. शर्मा, आर.एस. राजपूत, डी.सी. साहू, मनमोहन दीक्षित, जगदीश तिवारी, जी.पी. यादव, बृजकिशोर पटैरिया, एम.एल. तिवारी, बृजेश तेलंग, बी.एल. कुशवाहा और नरेश त्रिवेदी सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऑल इंडिया ग्रामीण बैंक कर्मचारी/अधिकारी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री एन.एल. योगी ने बताया कि संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से सम्बद्ध है। उन्होंने कहा कि टीकमगढ़ के निषाद भवन में पुलिस स्टडी सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के विभिन्न अंचलों से सेवानिवृत्त कर्मचारी भाग लेंगे।
उन्होंने पेंशनर्स की समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई सदस्यों को “लीव विदाउट पे” का भुगतान नहीं किया जा रहा है। अनेक पेंशनर्स की पेंशन राशि में कटौती की जा रही है, लेकिन इसकी समुचित जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों से ईपीएफ की कटौती होने के बावजूद उन्हें ईपीएफ पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है।
श्री योगी ने मांग उठाई कि पीएफ का भुगतान विलंब से होने पर संबंधित कर्मचारियों को ब्याज दिया जाना चाहिए। साथ ही सभी सदस्यों को पीपीओ पोस्ट, ईमेल अथवा पेंशन भुगतान करने वाली शाखाओं के माध्यम से उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि पे-स्लिप भी ईमेल के जरिए भेजी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कंप्यूटर इंक्रीमेंट मिलने के बाद भी नियमानुसार स्टैग्नेशन का लाभ दिया जाना चाहिए। कंप्यूटर इंक्रीमेंट के कारण मूल वेतन में हुई वृद्धि का लाभ ग्रेच्युटी, अवकाश नगदीकरण और अन्य भुगतान में भी जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेच्युटी की गणना में महंगाई भत्ता शामिल नहीं किया जा रहा है, जबकि इसे शामिल किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगी ने कहा कि बैंक प्रबंधन कर्मचारियों और पेंशनर्स की जायज मांगों को अनसुना करता है, लेकिन संगठन अपने अधिकार लेना जानता है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के हित में विभिन्न प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं, जिनकी पैरवी संगठन द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा कि संगठन ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” की लड़ाई भी सफलतापूर्वक लड़ी है। ग्रामीण बैंकों ने गांवों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और कर्मचारियों ने लंबे समय तक सेवा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।
कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त करते हुए नसीम सिद्दकी ने कहा कि पूर्व में कामरेड और बीएमएस दोनों को मिलाकर एक ही संगठन संचालित किया जा रहा था। उस समय यह सहमति बनी थी कि सभी एकजुट रहेंगे, लेकिन बाद में कुछ लोगों ने कामरेड संगठन से सम्बद्धता ले ली और खुले रूप से उसका झंडा-बैनर उपयोग होने लगा। ऐसी स्थिति में मजबूर होकर बीएमएस से सम्बद्ध नई यूनियन समिति का गठन करना पड़ा।
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