पटवारियों का आर-पार का संग्राम: पांच सूत्रीय मांगों को लेकर इटारसी में बस्ता जमा कर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू I
इटारसी। मध्यप्रदेश पटवारी संघ, तहसील शाखा इटारसी के पटवारियों ने प्रदेशव्यापी आह्वान के तहत वर्षों से लंबित अपनी पांच सूत्रीय मांगों के निराकरण के लिए पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। पटवारियों ने अपने बस्ते जमा कर पूर्णतः ‘कलमबंद हड़ताल’ शुरू कर दी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार श्री रामशंकर झरबड़े को एक ज्ञापन सौंपा गया।
यह ज्ञापन मध्य प्रदेश पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र जाटव और संभाग अध्यक्ष कन्हैया लाल व्यास के नेतृत्व में सौंपा गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय पटवारी उपस्थित रहे।
विज्ञप्ति के अनुसार, संघ लंबे समय से विभिन्न माध्यमों से अपनी जायज मांगों को शासन के समक्ष रखता आ रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मुख्यमंत्री से पूर्व में मिले आश्वासन के बावजूद न तो पटवारी महाधिवेशन का आयोजन हुआ और न ही लंबित मांगों का समाधान निकाला गया, जिससे पूरे प्रदेश का पटवारी संवर्ग उपेक्षित और आक्रोशित महसूस कर रहा है।
पटवारियों की 5 प्रमुख मांगें:
-
कैडर रिव्यू: कैडर रिव्यू लागू कर पटवारियों को पदोन्नति एवं समयमान वेतनमान का लाभ दिया जाए।
-
विभागीय परीक्षा: नायब तहसीलदार पद के लिए विभागीय परीक्षा शीघ्र आयोजित की जाए।
-
सुरक्षा कानून: पटवारियों को ‘जज प्रोटेक्शन एक्ट’ (Judge Protection Act) के दायरे में शामिल किया जाए।
-
मानदेय भुगतान: विभिन्न शासकीय योजनाओं के लंबित मानदेयों का तत्काल भुगतान हो।
-
तबादले निरस्त करना: संघ पदाधिकारियों के स्थानांतरण नीति के विरुद्ध किए गए तबादले तुरंत रद्द किए जाएं और समस्याओं के निराकरण हेतु नियमित परामर्शदात्री समिति की बैठकें बुलाई जाएं।
चरणबद्ध आंदोलन से अनिश्चितकालीन हड़ताल तक:
संघ ने स्पष्ट किया कि इससे पहले 20 से 23 जुलाई तक काली पट्टी बांधकर काम किया गया था और तीन दिवसीय सांकेतिक अवकाश भी लिया गया था। हालांकि, शासन के अड़ियल रवैये के कारण 6 अगस्त से शासकीय व्हाट्सएप ग्रुपों और ऑनलाइन कार्यों (वेबजीआईएस, सारा ऐप आदि) का पूरी तरह बहिष्कार करते हुए अनिश्चितकालीन पूर्ण कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी गई है।
पटवारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आंदोलन के दौरान किसी भी तहसील में पटवारियों पर दमनात्मक कार्रवाई की गई, तो आंदोलन और विकराल रूप धारण करेगा।
कुणाल की कलम से: शासन-प्रशासन के बीच पिसती जनता और व्यवस्था की लाचारी
जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था की सबसे मजबूत और प्राथमिक कड़ी ‘पटवारी’ ही होता है। किसान की ज़मीन का खसरा-खतौनी हो, नामांतरण हो, फसल गिरदावरी हो या फिर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ—हर काम पटवारी के बस्ते से होकर ही गुजरता है। ऐसे में पटवारियों का काम बंद कर सड़कों पर उतरना सीधे तौर पर आम जनता और किसानों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है।
शासन को यह समझना होगा कि आश्वासन देकर मांगों को अटकाए रखने का खामियाजा अंततः ग्रामीण और किसान वर्ग भुगतता है। वहीं दूसरी ओर, पटवारियों को भी डिजिटल दौर में अपनी मांगों के साथ-साथ जनसेवा के संतुलन का ध्यान रखना होगा। यदि समय रहते बातचीत के रास्ते तलाश कर इस गतिरोध को खत्म नहीं किया गया, तो इटारसी सहित पूरे प्रदेश में राजस्व व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी, जिसकी सीधी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
रिपोर्ट: पत्रकार कुणाल पासवान

