सीएम हेल्पलाइन को भी ठेंगा दिखा रहे इटारसी नगर पालिका के जिम्मेदार: 21 जुलाई से गुहार लगा रहे वार्ड 02 के निवासी, लेकिन नहीं चेते बेपरवाह अफसर I
इटारसी। प्रदेश सरकार भले ही आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए ‘सीएम हेल्पलाइन’ (181) की दुहाई देती थकती न हो, लेकिन इटारसी नगर पालिका के अधिकारियों के लिए यह व्यवस्था महज एक कागजी औपचारिकता बनकर रह गई है। नगर पालिका के बेपरवाह रवैये के कारण अब शहरवासियों का इस व्यवस्था से भी विश्वास उठता जा रहा है।
ताजा मामला दीवान कॉलोनी (वार्ड क्रमांक-02, पुरानी इटारसी) का है, जहाँ के रहवासी पिछले कई हफ्तों से गंदगी और बदहाली से जूझ रहे हैं।
21 जुलाई से दर्ज है शिकायत, पर सुनवाई शून्य
दीवान कॉलोनी के निवासियों ने वार्ड में फैली गंदगी, नालियों की सफाई न होने और नियमित कचरा न उठने की शिकायत 21 जुलाई को सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई थी। उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद जिम्मेदार हरकत में आएंगे और समस्या का समाधान होगा।
लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। 21 जुलाई से लेकर आज तक न तो क्षेत्र में सफाई व्यवस्था दुरुस्त की गई और न ही संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर जायजा लेना मुनासिब समझा।
कान में रेंग रही जू, न बेपरवाही हो रही कम
रहवासियों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर भी कई बार गुहार लगाई, लेकिन नगर पालिका सीएमओ (CMO) और स्वच्छता विभाग के अधिकारियों के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है। अधिकारियों का यह बेपरवाह और टालमटोल वाला रवैया साफ दर्शाता है कि उनके सामने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के निर्देशों की भी कोई अहमियत नहीं बची है।
“जब प्रदेश के सर्वोच्च पद से संचालित हेल्पलाइन की शिकायतों का यह हाल है, तो आम जनमानस की सीधी सुनवाई का क्या आलम होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।” — स्थानीय रहवासी
शहर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक वार्ड क्रमांक-02 के लोग इस गंदगी और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार बनते रहेंगे? क्या आला अधिकारी किसी महामारी या बड़े आंदोलन का इंतजार कर रहे हैं?
💡 पत्रकारिया विचार (सम्पादकीय दृष्टिकोण)
क्या वाकई निष्प्रभावी हो रही है सीएम हेल्पलाइन?
यह मामला केवल एक वार्ड की गंदगी का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रशासनिक व्यवस्था में आम नागरिक के टूटते भरोसे का है। ‘सीएम हेल्पलाइन’ की परिकल्पना इसलिए की गई थी ताकि निचले स्तर पर सुनवाई न होने पर आम आदमी को राज्य स्तर से न्याय और सुविधा मिल सके।
परंतु, जब स्थानीय अधिकारी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को भी दरकिनार करने लगें, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक अनुशासनहीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। यदि समय रहते ऐसे बेपरवाह अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई नहीं की गई, तो यह जनहित की योजनाओं और सुशासन के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा करता रहेगा।
– पत्रकार कुणाल पासवान
