टीकमगढ़। पर्यूषण पर्व के समापन के अवसर पर शनिवार को शहर में विशाल शोभायात्रा एवं श्रीजी का विमान निकाला गया।
बाजार मंदिर से शुरू होकर राजेन्द्र पार्क में हुआ समापन
दोपहर 2 :30 बजे श्री पारसनाथ बाजार जैन मंदिर से शोभायात्रा प्रारंभ हुई जो शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए शाम 5 :10 बजे राजेन्द्र पार्क पहुंची। वहां जुलूस का समापन हुआ। आयोजन सूर्य सागर दिगंबर जैन हाई स्कूल द्वारा किया गया।
बैंड बाजों के साथ नाचते गाते चले श्रद्धालु
शोभायात्रा में बग्गी में आचार्य श्री का कट आउट अहिंसा दिव्य घोष दयोदय बैंड एवं ब्रास बैंड साथ चल रहे थे। युवक युवतियां भगवान के आगे नाचते गाते चल रहे थे। महिला मंडल अलग अलग ड्रेस में जबकि पुरुष वर्ग सफेद वस्त्र धारण किए हुए था। श्रीजी विमान में विराजमान थे। जगह जगह श्रद्धालुओं ने श्रीजी की आरती उतारी।
नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल ग़फ्फ़ार पप्पू मलिक ने उत्तम क्षमा के पावन अवसर पर नजर बाग के सामने जुलूस का स्वागत करते हुए पुष्प वर्षा की। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को उत्तम क्षमा पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि क्षमा संयम और सद्भाव का यह संदेश सभी के जीवन में प्रेम और शांति का संचार करे।
प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि सिंधी धर्मशाला के पास संपूर्ण नंदीश्वर कॉलोनी समाज द्वारा श्रीजी की आरती उतारी गई। राजेन्द्र पार्क में श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ।
पंडित जी का उद्बोधन बैर भाव त्यागें क्षमा मांगें
पंडित जी ने कहा कि वर्तमान शासन नायक भगवान महावीर स्वामी के काल में विराजकर उन्हीं के द्वारा प्रवर्तित व्रतों में महाव्रत जिसे अहिंसा कहा गया है उसी की चर्चा के लिए सभी एकत्र हुए हैं। आप लोगों ने पर्यूषण के 10 दिनों में सामर्थ्य अनुसार भगवान की पूजा अर्चना की आप पुण्यशाली हैं।
उन्होंने कहा कि आज क्षमा वाणी का पावन पर्व है। जीवन में किसी से दुश्मनी और बैर भाव न रखें। जिससे भी मनमुटाव हो उससे जाकर क्षमा याचना करें तभी क्षमा वाणी सार्थक होगी। भगवान महावीर ने भी बैर भाव त्यागकर आत्म कल्याण कर मोक्ष प्राप्त किया था।
रविवार रात्रि 8 बजे आदिनाथ धाम में क्षमा वाणी पर्व मनाया गया जहां सभी ने एक दूसरे से क्षमा याचना की।
नगर पालिका अध्यक्ष ने मांगी क्षमा बोले सबको क्षमा सबसे क्षमा
उत्तम क्षमा के पावन अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष अब्दुल ग़फ्फ़ार ने जैन समाज सहित शहरवासियों से क्षमा याचना की। उन्होंने कहा कि मन वाणी विचार और कार्य से यदि किसी को ठेस पहुंची हो तो मुझे माफ कर दें। सबको क्षमा सबसे क्षमा ही सच्चा पुरुषार्थ है क्रोध के समय क्षमा धारण करना ही सच्ची वीरता है।
उन्होंने जैन समाज के सभी धर्मगुरुओं को प्रणाम करते हुए कहा कि टीकमगढ़ जिस तरह एकता और अखंडता का प्रतीक बन रहा है उसके लिए वे सभी धर्मगुरुओं के आभारी हैं। उन्होंने अपने परिवार मुस्लिम समाज और पूरे शहर की ओर से जैन बंधुओं को जय जिनेंद्र और उत्तम क्षमा कहा।
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