रेलवे कॉलोनी में हरे भरे पेड़ो पर चल रही कटर मशीन शहर के सभी संघठन मौन सूखे की जगह हरे भरे पेड़ो को किया जा रहा ध्वस्त,
नगरपालिका से अनुमति लिये बिना काटे जा रहे पेड़, जिम्मेदार मौन
सूखे, खतरनाक पेड़ों की जगह हरे-भरे पेड़ों को किया जा रहा ध्वस्त
संवाददाता दिलीप पाल आमला
आमला. एक तरफ जल, जंगल को बचाने की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ रेलवे कालोनी में हरे-भरे पेड़ों पर आरा मशीन चलाकर काट दिया गया। यहां नीलगिरी, जामुन, आम, नीम, गुलर, सोबामु, पीपल सहित अन्य प्रजाति के करीब एक दर्जन से अधिक पेड़ों को काटे जाने की जानकारी मिली है। हरे-भरे पेड़ काटने पर लोगों ने एतराज भी जताया है और कार्रवाही की मांग भी की है। दरअसल रेलवे विभाग ने रेलवे कालोनी में पेड़ों को काटे जाने का ठेका दिया है। जानकारी यह भी है कि विभाग ने सूखे और खतरनाक साबित होने वाले करीब 281 पेड़ काटने का ठेका दिया है, लेकिन ठेकेदार ने हरे-भरे पेड़ों को भी काटकर ध्वस्त कर दिया। इन पेड़ों को पूर्व में कर्मचारियों द्वारा ही लगाया गया था, जो अब बड़े हो चुके है। हैरानी की बात तो यह है कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अनेक संस्थाएं विशेष अभियान चला रही हैं। लोगों को पौधे लगाने के लिए जागरुक किया जा रहा है। वहीं दूसरी इतनी बढ़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। लेकिन किसी ने भी विरोध के स्वर बुलंद नहीं किये है। शहर वासियों का कहना है कि कोरोना काल में ऑक्सीजन के महत्व को समझा दिया, इसके बाद भी हरे-भरे पेड़ों को काटना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है। ऐसे गैर-जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाही की जानी चाहिए, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे है।
पर्यावरण को नुकसान, संगठन मौन ………..
एक तरफ शहर के जागरूक संगठन पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़ी मात्रा में पौधारोपण कर रहे है तो दूसरी तरफ रेलवे विभाग द्वारा इस तरह पेड़ों को कटना पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना है। रेलवे सहलाकर समिति के सदस्य पंडित राजेन्द्र उपाध्याय का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और शहर को हरा-भरा बनाए जाने के लिए प्रशासन द्वारा कई प्रकार के दावे किए जा रहे हैं। साथ ही पौधे भी लगवाए जा रहे हैं। जिन्हें लगवाए जाने के एवज में राशि भी खर्च की जा रही है। लेकिन पौधे लगवाए जाने के बाद इन्हें पेड़ बनते ही काटना अनुचित है। इस दिशा में स्थानीय प्रशासन को कार्रवाही करना चाहिए। इस सम्बंध में रेल महाप्रबंधक से शिकायत कर जांच की मांग की जायेगी।
सूखे और खतरनाक की जगह काट रहे हरे पेड़ …………..
पेड़ कटाई के लिए रेलवे विभाग ने ठेकेदार को ठेका दिया हुआ है। जिसमें सूखे और खतरनाक साबित होने वाले पेड़ों का काटे जाने का उल्लेख है, लेकिन ठेकेदार द्वारा हरे-भरे पेड़ों पर भी बेखौफ आरा मशीन चलाकर ध्वस्त किये जा रहे है। जानकारों की माने तो नगरपालिका क्षेत्र में पेड़ कटाई के लिए पहले नगरपालिका अधिकारी की अनुमति लेना होता है। इसके बाद ही पेड़ काटा जा सकता है। अगर बिना अनुमति कोई भी विभाग पेड़ काटता है तो नगरपालिका द्वारा कार्रवाही की जा सकती है।
लोगों ने जाहिर की नाराजगी, कार्रवाही की मांग ………….
रेलवे कालोनी के आसपास रहने वाले लोगों ने हरे-भरे पेड़ काटे जाने को लेकर रोष जताया है। उनका कहना है कि रेलवे विभाग द्वारा सूखे और खतरनाक पेड़ काटने का काम दिया है, लेकिन ठेकेदार हरे-भरे पेड़ों को भी काट रहा है। इस दिशा में नगरपालिका और वन विभाग को सख्त कार्रवाही की जानी चाहिए। जिससे भविष्य में कोई भी इस तरह पेड़ों को नुकसान न पहुंचा सके। इधर रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पेड़ काटने का ठेका वरिष्ठ कार्यालय से हुआ है। इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं है।
इनका कहना है ……………………………
रेलवे कॉलोनी में जो पेड खतरनाक है, उनको चयनित किया गया है। ऊपर से ही पेड़ काटने का ठेका दिया गया है।
व्हीके शुक्ला, सीनियर सेक्शन इंजीनियर, रेलवे आमला
क्षेत्र रेलवे विभाग का है उनके द्वारा नगर पालिका से पेड़ काटने से सम्बंधित कोई अनुमति नही ली गई है।
बबन कुंभारे राजस्व निरीक्षक नगर पालिका आमला
