एक्शन में कलेक्टर सोमेश मिश्रा: नर्मदापुरम में मूंग रीसर्कुलेशन पर कड़ा प्रहार, पुराने वेयरहाउस होंगे सील! I
नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा घोषित उपार्जन नीति के तहत जिले में 1 जुलाई से 20 अगस्त 2026 तक ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द की समर्थन मूल्य (Price Support Scheme) पर खरीदी जारी है। उपार्जन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, मूंग के अवैध रीसर्कुलेशन को रोकने और वास्तविक किसानों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं।
कलेक्टर के कड़े निर्देश: 5 प्रमुख बिंदु
-
पुराने वेयरहाउस रहेंगे पूरी तरह सील: उपार्जन केंद्रों को छोड़कर ऐसे सभी वेयरहाउस, जहाँ पहले से मूंग का भंडारण है, उन्हें उपार्जन अवधि खत्म होने तक सील किया जाएगा।
-
एसडीएम (SDM) की लिखित अनुमति अनिवार्य: किसी भी स्थिति में भंडारित मूंग की निकासी केवल संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी की लिखित अनुमति और अधिकृत अधिकारी की मौजूदगी में ही होगी, ताकि यह मूंग दोबारा उपार्जन केंद्रों पर न पहुंचे।
-
👥 संयुक्त जांच दल का गठन: जिले के सभी अनुभागों में राजस्व, मंडी समिति और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
-
7 दिनों में 100% भौतिक सत्यापन: जांच दल मंडी क्षेत्र के सभी मूंग व्यापारियों, मिलर्स और स्टॉकहोल्डर्स के गोदामों में उपलब्ध स्टॉक का 7 दिवस के भीतर शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन करेगा।
-
रिकॉर्ड से होगा स्टॉक का मिलान: स्टॉक का मिलान मंडी आवक-जावक पंजी, गेट पास और क्रय-विक्रय बिलों से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। बिना अभिलेख या संदिग्ध स्टॉक पाए जाने पर संबंधित व्यापारी पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।
मंडी सचिवों को दैनिक रिपोर्ट देने के निर्देश
कलेक्टर के आदेशानुसार, मंडी सचिव रोजाना मूंग की आवक और व्यापारियों के पास उपलब्ध कुल स्टॉक की विस्तृत रिपोर्ट संबंधित अनुविभागीय दण्डाधिकारी एवं जिला कार्यालय को सौंपेंगे।
कलेक्टर सोमेश मिश्रा का स्पष्ट संदेश:
“समर्थन मूल्य पर उपार्जन की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। किसी भी बिचौलिये या व्यापारी को धांधली की इजाजत नहीं दी जाएगी। शासन का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल वास्तविक किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाना है।”
आज का विचार (Thought of the Day)
“किसान का पसीना देश की समृद्धि की वास्तविक नींव है। जब प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी होगी, तभी खेत में मेहनत करने वाले अन्नदाता को उसका असली अधिकार मिलेगा।”
रिपोर्ट: पत्रकार कुणाल पासवान

