नर्मदापुरम -शहर की राशन दुकानों पर गरीबों को खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं ग्वालटोली क्षेत्र में वार्ड 20 और 29 के हितग्राहियों के लिए आवंटित राशन दुकान संचालक की मनमानी से हितग्राहियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी I
नर्मदापुरम – शहर की राशन दुकानों पर गरीबों को खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं है। सोमवार को ग्वालटोली क्षेत्र में वार्ड 20 और 29 के हितग्राहियों के लिए आवंटित राशन दुकान संचालक की मनमानी से हितग्राहियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। दुकान संचालक ने वार्ड की पीओएस दुकान क्रमांक 2601062 श्री कृष्ण सुदर्शन को बंद करके रखा, वहीं दुकान के प्रबंधन ने वार्ड 33 की राशन दुकान श्रीकृष्णा उपभोक्ता भंडार 2601098 पर पीओएस मशीन के माध्यम से अंगूठा लगवाकर 2601062 के हितग्राहियों को भी राशन वितरण किया। यानि दोनों दुकानें 2601098 और 2601062 एक ही टेबल से संचालित हुईं। दोनों दुकानों के विक्रेेता और सहायक एक ही जगह उपलब्ध थे। वहीं वार्ड 20 और 29 की दुकान 2601062 के हितग्राही राशन दुकान खुलने का इंतजार करते रहे, इसके बाद जहां-तहां से जानकारी मिलने के बाद वार्ड 33 की दुकान पर राशन लेेने पहुंचे।
रसूखदारों को संरक्षण…..
गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले रसूखदारों को जिला आपूर्ति विभाग का खुला संरक्षण मिलता दिखाई दे रहा है। श्री कृष्णा सुदर्शन उपभोक्ता प्राथमिक भंडार (वार्ड-33) में उजागर हुए सवा दो लाख रुपये के गबन मामले में अब तक न तो वसूली हो पाई है और न ही दोषियों को जेल भेजा गया है। आश्चर्य की बात यह है कि कार्रवाई करने के बजाय विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर दूसरी दुकान का प्रभार भी उन्हीं विवादित हाथों में सौंप दिया है। दुकान का संचालन दो भाइयों द्वारा किया जा रहा है यह भी एक जांच का विषय है।
आदेश की उड़ी धज्जियां 7 दिन की मोहलत, बीत गए कई महीने…….
विभागीय जांच में सहायक आपूर्ति अधिकारी दिनेश अहिरवार ने दुकान संचालक और विक्रेता को 2,25,000 के अनाज गबन का दोषी पाया था। प्रशासन ने सख्त लहजे में 7 दिनों के भीतर राशि सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया था। नियमानुसार, राशि जमा न होने पर तत्काल एफ आई आर दर्ज की जानी थी, लेकिन जिला आपूर्ति नियंत्रक कार्यालय की ‘विशेष कृपा’ के चलते आज तक पुलिस थाना ग्वालटोली में मामला नहीं पहुंचा है।
नियमों का खेल, गबन की आरोपी दुकान को दूसरी दुकान से जोड़ा
मामला तब और संदिग्ध हो गया जब कार्रवाई करने के बजाय गबन की शिकार दुकान को दुकान क्रमांक 33 (कृष्ण प्राथमिक उपभोक्ता भंडार) से संलग्न कर दिया गया। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इन दोनों दुकानों का संचालन पर्दे के पीछे से एक ही प्रभावशाली व्यक्ति कर रहा है। नियम कहते हैं कि विवादित या डिफाल्टर दुकान को किसी निष्पक्ष एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए, लेकिन यहाँ ‘रक्षक ही भक्षक’ की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
बैतूल से नर्मदापुरम तक ‘संरक्षण’ का जाल…….
जिले में पदस्थ आला अधिकारी की कार्यप्रणाली पहले भी सवालों के घेरे में रही है। हाल ही में बैतूल में दो ट्रक चावल घोटाले में भी इन्हीं अधिकारी के खिलाफ एफआईआर के निर्देश हुए थे, लेकिन राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक मिलीभगत के चलते वह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब वही ‘पैटर्न’ नर्मदापुरम में दोहराया जा रहा है।
जनता परेशान, राशन का ठिकाना नहीं…….
इस प्रशासनिक बंदरबांट का खामियाजा गरीब उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। वार्ड के निवासियों का कहना है कि दुकान कभी समय पर नहीं खुलती। अनाज मांगने पर अभद्रता की जाती है। रसूखदारों के डर से अधिकारी शिकायत सुनने को तैयार नहीं हैं। अब सवाल यह है कि कलेक्टर इस खुली धांधली पर संज्ञान लेंगे या फिर गरीबों का राशन इसी तरह फाइलों और सांठगांठ की भेंट चढ़ता रहेगा?
इनका कहना है……..
इस मामले में दुकान के ऊपर अभी प्रकरण बना है और नोटिस दिया गया है। इसको लेकर जल्द ही जांच होगी इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
रश्मि साहू,
जिला आपूर्ति अधिकारी नर्मदापुरम।

पत्रकार-कुणाल पासवान
मो-7581988260

