बड़ी खबर: 2029 से पहले बदल जाएगा भारतीय लोकतंत्र का स्वरूप, लोकसभा में बढ़ेंगी 50% सीटें I
नई दिल्ली | भारतीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्र सरकार वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने और देश के विधायी ढांचे में बड़ा विस्तार करने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित योजना के तहत संसद में परिसीमन के माध्यम से लोकसभा की सीटों में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा सकती है।
543 से बढ़कर 816 हो सकती हैं सीटें
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 816 किए जाने का प्रस्ताव है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण को लागू करना और बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। सरकार की कोशिश है कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए ताकि 2027 की जनगणना की प्रतीक्षा किए बिना इसे 2029 के चुनाव से पहले अमलीजामा पहनाया जा सके।
किस राज्य को मिलेगा कितना लाभ?
सीटों के पुनर्निर्धारण से उत्तर भारत से लेकर दक्षिण भारत तक, लगभग सभी राज्यों की राजनीतिक ताकत में इजाफा होगा। प्रस्तावित आंकड़ों के अनुसार:
| राज्य | वर्तमान सीटें | संभावित नई सीटें | वृद्धि |
| उत्तर प्रदेश | 80 | 120 | +40 |
| महाराष्ट्र | 48 | 72 | +24 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 63 | +21 |
| बिहार | 40 | 60 | +20 |
| तमिलनाडु | 39 | 59 | +20 |
| मध्य प्रदेश | 29 | 44 | +15 |
| राजस्थान | 25 | 38 | +13 |
महिला और आरक्षित वर्गों की बढ़ेगी भागीदारी
इस परिसीमन का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा:
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महिला आरक्षण: कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
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SC/ST आरक्षण: अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 होने का अनुमान है।
दक्षिणी राज्यों का रुख: जनसंख्या नियंत्रण के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश) की चिंताओं को देखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य के प्रतिनिधित्व को कमजोर नहीं किया जाएगा, बल्कि वहां भी आनुपातिक रूप से सीटें बढ़ाई जाएंगी।
आगे की राह
इस महा-योजना को लागू करने के लिए सरकार को संसद में संवैधानिक संशोधन पेश करना होगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस दिशा में आम राजनीतिक सहमति बनाने के प्रयास शुरू कर चुकी है। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो 2029 का आम चुनाव भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे बड़ा और समावेशी चुनाव होगा।
पत्रकार-कुणाल पासवान
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