टीकमगढ़। आचार्य परंपरा के प्रख्यात संत विशुद्ध सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अंतर्गत दीक्षा कल्याणक का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस पावन अवसर पर चार श्रद्धालुओं को जनेश्वरी दीक्षा प्रदान की गई।
दीक्षा समारोह के दौरान एक छल्लक से मुनिराज, दो श्रावकों से मुनिराज एवं एक श्रावक से ऐलक (ईलाइक) बनाए गए। मुनि श्री ने स्वयं अपने करकमलों से दीक्षा की समस्त विधियां संपन्न कराईं, चारों का अभिषेक किया एवं उन्हें कमंडल भेंट कर संयम जीवन की शुरुआत कराई।
मुनि श्री ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज से आप सभी ने जनेश्वरी दीक्षा धारण कर ली है, अब आपको दिगंबर मुद्रा का पालन करते हुए मुनिराज धर्म के मार्ग पर चलना है और आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर अग्रसर रहना है।
इस भावुक एवं आध्यात्मिक दृश्य के साक्षी बने पूर्व विधायक राकेश गिरी गोस्वामी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी गिरी गोस्वामी एवं उनके पुत्र राजगिरी गोस्वामी। उन्होंने अत्यंत भाव-विभोर होकर इस दिव्य क्षण का अवलोकन किया।
इस अवसर पर उपस्थित जनों ने कहा कि जिन्होंने दीक्षा ग्रहण की है, उन्होंने वैराग्य के पथ पर चलना प्रारंभ कर दिया है। यह दृश्य देखकर हर किसी के मन में जैन धर्म के त्याग और तप की महिमा के प्रति श्रद्धा और भी प्रगाढ़ हो गई।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने नवदीक्षित मुनियों के उज्ज्वल वैराग्य पथ की सफलता की कामना करते हुए “नमोस्तु शासन, नमोस्तु शासन, जयवंत हो” के जयघोष लगाए।
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