इटारसी: बचपन से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले बाल चित्रकार समीर भारके अपनी चित्रकला में इतने महारथी है कि उनके पेंटिंग की हुई तस्वीर बोलती हुई प्रतीत होती है। गौरतलब है कि समीर भारके कक्षा 12वीं शासकीय सांदीपनि उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के होनहार विद्यार्थी हैं। वे विगत 3 वर्षों से गणेश उत्सव एवं नवरात्रि की झांकियां में बढ़ चढ़कर अपनी चित्रकला का अति आकर्षक प्रदर्शन करते आ रहे हैं। गत वर्ष शक्ति गरबा उत्सव की झांकी में भी उनकी अद्भुत पेंटिंग कला का प्रदर्शन देखने को मिला था। वह चित्रकला पेंटिंग को रोजगार मे अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को संबलता प्रदान कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत विकास खंडस्तरीय प्रतियोगिता जो की शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पवारखेड़ा में आयोजित की गई थी । उसमें उसमें उन्होंने 2047 में ऐ आई से होने वाले लाभों को अद्भुत, अकल्पनीय तरीके से अपने सपनों के भारत के लिए बहुत ही सुंदर रंगो द्वारा भरकर अपनी चित्रकला पेंटिंग में प्रदर्शित किया था। इस पेंटिंग को देखकर ईश्वर की दी हुई अदभुत कला का सजीव चित्रण प्रस्तुत होता हैं। सवाल उठता है कि इस विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता में इनकी पूरे देश को लोहा मनवाने वाली पेंटिंग का चयन आगे जिला स्तर में आखिर क्यों नहीं हुआ। देखने में स्पष्ट आया है कि विकासखंड स्तरीय प्रतियोगिता के दिए गए निर्णय शासकीय कन्या उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के निर्णय के अनुसार दिखें। जो कि विद्यार्थियों की वास्तविक चित्रकला प्रतिभा को पीछे करने के लिए शर्मसार करने वाले थे। एक ज्वलंत सवाल उठता है कि फाइन आर्ट के डिग्री धारक निर्णायक क्या अपनी कला के लिए ही ईमानदार नहीं है। स्पष्ट ऑब्जेक्ट प्रदर्शन होने के बावजूद भी वह क्यों पक्षपात के सब्जेक्टिव प्रतीत हुए। इस चित्रकला के प्रदर्शन में किसी प्रकार का कोई बहाना या किसी प्रकार की कोई चूक स्वीकार नहीं की जा सकती है। इस संबंध में आयुष प्रताप वेलफेयर संस्थान इटारसी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय पीएमओ में उनकी पेंटिंग भेज कर इस बारे में उन्हें अवगत कराया जाएगा ताकि उनका संकल्प मेरे सपनों के भारत का वास्तविक रूप में चरितार्थ हो सके।

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