स्वामित्व योजना के तहत पंजीयन कार्य में लाई जाए गति: कलेक्टर सोमेश मिश्रा I
धीमी प्रगति पर कलेक्टर ने व्यक्त की सख्त नाराजगी; लापरवाही पर दी कार्यवाही की चेतावनी, आंगनबाड़ी केंद्र का भी किया निरीक्षण
नर्मदापुरम/डोंगरवाड़ा। नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा शुक्रवार को ग्राम डोंगरवाड़ा में आयोजित ‘स्वामित्व पंजीयन शिविर’ का औचक एवं विस्तृत निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने उपस्थित तहसीलदार एवं पटवारियों से पंजीयन कार्य, हितग्राहियों को लाभ वितरण की स्थिति तथा लंबित प्रकरणों के संबंध में बिंदुवार जानकारी ली।
अपेक्षित प्रगति न मिलने पर सख्त रुख: कलेक्टर श्री मिश्रा ने शिविर के दस्तावेजों, अभिलेखों एवं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रगति का अवलोकन किया। प्रगति संतोषजनक न पाए जाने पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामित्व योजना जैसी महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को शासन के दिशा-निर्देशों एवं एसओपी का शत-प्रतिशत पालन करते हुए कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आगामी एक सप्ताह के भीतर प्रगति में अपेक्षित सुधार नहीं होता है, तो संबंधितों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
ग्राम सभा और ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम का जायजा:
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ग्राम सभा निरीक्षण: 2 अक्टूबर, महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित ग्राम सभा का जायजा लेते हुए कलेक्टर ने प्राप्त प्रस्तावों का अवलोकन किया और विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर नियमनुसार स्वीकृत कर शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए।
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आंगनबाड़ी का निरीक्षण: ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत संचालित ‘आंगन मिलन’ कार्यक्रम के तहत उन्होंने डोंगरवाड़ा के आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण कर पोषण आहार, साफ-सफाई व बच्चों की उपस्थिति का जायजा लिया।
बच्चों संग दिखा कलेक्टर का संवेदनशील और सहज अंदाज: निरीक्षण के दौरान एक भावुक और आत्मीय पल तब देखने को मिला जब कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने ग्रामसभा में उपस्थित छोटे बच्चों को देखा। वे खुद बच्चों के सामने नीचे बैठकर उनसे पढ़ाई और भविष्य के सपनों को लेकर बातें करने लगे। उन्होंने बच्चों को टॉफी, किताबें और पेन भेंट कर मन लगाकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर के इस आत्मीय व्यवहार से बच्चे बेहद खुश नज़र आए।
आज का विचार (Aaj Ka Vichar):
“जब दायित्व के साथ संवेदनशीलता और अनुशासन जुड़ता है,
तब प्रशासनिक कार्य केवल एक व्यवस्था नहीं रहते, बल्कि ,
जन-कल्याण का एक सशक्त माध्यम बन जाते हैं।”
रिपोर्टर: पत्रकार कुणाल पासवान

