नर्मदापुरम जिला अस्पताल में घोर लापरवाही: ऑपरेशन के बाद टांके गले, नर्सों के भरोसे रही मरीज की जान I
नर्मदापुरम-(मध्य प्रदेश): स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलते हुए नर्मदापुरम जिला अस्पताल से लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ एक महिला मरीज, अमृता पटेल के ऑपरेशन के बाद टांके गलने और संक्रमण फैलने का आरोप लगा है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के कारण मरीज की जान जोखिम में डाल दी गई।
10 दिनों तक नहीं आया कोई डॉक्टर पीड़ित महिला के परिजनों के अनुसार, अमृता पटेल का ऑपरेशन 18 जनवरी को हुआ था, जिसके बाद उन्हें 27 जनवरी तक अस्पताल में भर्ती रखा गया। इस दौरान टांके गलने लगे और घाव से पानी आने लगा, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इस पूरे समय में किसी विशेषज्ञ डॉक्टर ने मरीज की सुध नहीं ली। पूरा इलाज कथित तौर पर स्टाफ नर्सों के भरोसे चलता रहा और अंततः लापरवाही बरतते हुए मरीज को छुट्टी दे दी गई।
प्राइवेट अस्पताल में खुली अस्पताल की पोल
अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब मरीज के टांके कटवाए गए, तब पता चला कि संक्रमण (इन्फेक्शन) के कारण चमड़ी गलना शुरू हो चुकी थी। स्थिति बिगड़ने पर परिजनों ने 3 फरवरी को उन्हें निजी एम्बुलेंस के जरिए पुनः सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया।
पुनः भर्ती के बाद भी अनदेखी जारी
मरीज के पति ने बताया कि:
“3 फरवरी से 6 फरवरी तक दोबारा भर्ती रहने के बावजूद कोई डॉक्टर इलाज के लिए नहीं आया। सिस्टम की इस लापरवाही से तंग आकर हमने अपनी पत्नी को आईटीआई अस्पताल (निजी) में शिफ्ट किया है।”
अस्पताल प्रबंधन पर सवाल
परिजनों का कहना है कि जिला अस्पताल की इस अव्यवस्था और डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण कई गरीब मरीज परेशान हो रहे हैं। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर जिला अस्पताल में मरीजों को नर्सों के भरोसे छोड़ दिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस मामले में अब तक अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों में जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है।

पत्रकार-कुणाल पासवान
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