

नर्मदापुरम /सत्संग चौक सेठानी घाट पर आयोजित पांच दिवसीय पंडित रामलाल शर्मा स्मृति समारोह के दूसरे दिन व्यासगादी से प्रवचन देते हुए श्रीमती कृष्णा देवी मिश्रा ने कहा कि श्री हनुमान जी और विभीषण जी की परिस्थितियों में कई समानताएं हैं। दोनों को ही श्री सीताराम जी अर्थात भगवान प्राप्ति के मार्ग में आने वाली कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।श्री हनुमान जी जब माता सीता की खोज में यात्रा प्रारंभ करते हैं तो उनके रास्ते में अनेक विघ्न उपस्थित होते हैं, और अंत में वे सभी कठिनाइयों को पार कर मां जानकी के दर्शन करते हैं। यह उनके अखंड विश्वास के कारण होता है। इसी तरह जिस तरह लंका में राक्षसों के बीच रहकर भी विभीषण अपने घर में तुलसी के पौधे और रामायुध् अंकित घर में सुबह-सुबह राम राम सुमिरन करते हैं वह उनकी साधुता और सज्जनता का परिचय देता है। सुंदरकांड में आता है राम राम तेहि सुमिरन कीन्हा ,हृदय हरस कपि सज्जन चीन्हा ।अर्थात जो व्यक्ति सुबह उठकर भगवान का नाम स्मरण करता है यथार्थ में वही सज्जन है। आपने शरणागति प्रसंग को विस्तार देते हुए कहा कि हनुमान जी विभीषण को भ्राता कहकर संबोधित करते हैं अर्थात शरणागति की दृष्टिकोण से वे दोनों ही भगवान के दृढ़ भरोसे हैं ।केवल श्री हनुमान जी एवं विभीषण ही नहीं वरन हम सब भी जैसे किसी बड़े चित्र में अंकित वस्तु चित्र का ही भाग होती है इस तरह भगवान के ही हैं। बस हमें अपने विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता है यदि हनुमान जी रूपी सद्गुरु हमें मिल जाते हैं तो हमारी नैया भी इस भवसागर से पार हो सकती है ।श्रीमती कृष्णा देवी ने कथा प्रसंग के दौरान श्री रामकृष्ण परमहंस के कई संस्करणों के साथ-साथ कृति वास रामायण के भी विभिन्न प्रसंग का उल्लेख किया। कार्यक्रम के आरंभ में श्रीमती कृष्णा देवी का स्वागत पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत पंडित भवानी शंकर शर्मा के साथ ,प्रो के जी मिश्र , सागर शिवहरे ,वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी , सन्तोष उपाध्याय , महेंद्र चौकसे , ओ पी शर्मा ने किया स्वागत के पश्चात भजनांजली के अंतर्गत भजन गायक चित्रांश गोपाल अग्रवाल द्वारा सुमधुर भजन की प्रस्तुति दी गई ।आपके साथ सक्षम पाठक द्वारा तबला आदित्य परसाई द्वारा हारमोनियम एवं गिटार पर यश मालवीय द्वारा सहयोग किया गया। कार्यक्रम का समापन श्रीमती कृष्णा देवी के सुप्रसिद्ध शयन पद नैनों में नींद भर आई के द्वारा हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।

