टीकमगढ़। शहर के सभी जिनालयों में शुक्रवार को दस लक्षण पर्व का अंतिम दिवस अनंत चतुर्दशी के साथ धूमधाम से मनाया गया। आदिनाथ धाम में सुबह 6:30 बजे से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था। पर्यूषण पर्व के अंतिम दिन सैकड़ों लोगों ने भगवान का अभिषेक किया।
प्रदीप जैन बम्हौरी ने बताया कि आदिनाथ धाम में प्रवीण शास्त्री के सानिध्य में सुबह 8 बजे श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुई। पर्यूषण पर्व की प्रमुख पूजाएं संपन्न हुईं। भाद्र शुक्ल अनंत चतुर्दशी को जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर वासुपूज्य भगवान का निर्वाण महोत्सव मनाया गया और निर्वाण लाडू चढ़ाया गया।
जैनागम में अनंत चतुर्दशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन विशेष प्रकार की ऊर्जा रहती है जो समस्त मनोरथ पूर्ण करती है। इस दिन समाज के अधिकतर लोग उपवास रखते हैं।
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर दिया प्रवचन
पूजन शिविर के समापन अवसर पर उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर बोलते हुए प्रवीण शास्त्री ने कहा कि ब्रह्मचर्य के प्रभाव से ही श्री नेमिकुमार ने राजकुमारी से विवाह त्याग कर वैराग्य धारण किया और मुनि दीक्षा लेकर तीर्थंकर नेमिनाथ कहलाए।
उन्होंने कहा कि शील की रक्षा के लिए नौ बाड़ों का पालन करना चाहिए। अपने से बड़ी स्त्रियों को माता के समान, समान आयु की स्त्रियों को बहन के समान और छोटी स्त्रियों को बेटी के समान देखना चाहिए। ब्रह्म स्वरूप आत्मा में लीन होना ही दस लक्षण पर्व की सार्थकता है।
शनिवार को क्षमा वाणी पर्व
शनिवार को क्षमा वाणी पर्व मनाया जाएगा। बाजार जैन मंदिर से दोपहर 1 बजे मुनि श्री विवेक सागर ससंघ के सानिध्य में शोभायात्रा निकाली जाएगी।

