टीकमगढ़। पुलिस मुख्यालय, मध्यप्रदेश द्वारा संपूर्ण राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई के मार्गदर्शन में जिले में भी सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु जिला स्तरीय व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है।
इस अभियान का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि आमजन के मन में यह चेतना जागृत करना है कि *सड़क पर चलने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी का अपना है और उसकी सुरक्षा हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। इसी भावना के साथ जिलेवासियों को शासन की सड़क सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण योजनाओं से अवगत कराने हेतु यह ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की जा रही है।
—-राहवीर योजना, मानवता को सम्मान मध्यप्रदेश शासन—सड़क दुर्घटना के बाद घायल को समय पर अस्पताल पहुँचाना अनेक बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करता है। इसी उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन द्वारा राहवीर योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत यदि कोई नागरिक सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुँचाता है, तो उसे 25,000 पच्चीस हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया जाता है। उल्लेखनीय है कि मदद करने वाले व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही, पुलिस पूछताछ या आर्थिक जिम्मेदारी से पूर्णतः मुक्त रखा जाता है। यह योजना समाज में यह संदेश देती है कि *मानव जीवन की रक्षा करने वाला हर नागरिक राज्य का सम्मानित सहयोगी है।—गुड सेमेरिटन योजना, निडर सहायता की गारंटी भारत सरकार—भारत सरकार द्वारा लागू गुड सेमेरिटन योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में सहायता करने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है। ऐसे मददगार नागरिक को न तो पुलिस थाने बुलाया जाता है और न ही अस्पताल द्वारा अनावश्यक पूछताछ की जाती है। यह योजना आम नागरिकों को यह विश्वास दिलाती है कि घायल की मदद करना कोई जोखिम नहीं, बल्कि गर्व का विषय है। निडर होकर की गई एक कोशिश किसी परिवार की खुशियाँ लौटा सकती है।—-गोल्डन ऑवर, जीवन बचाने का स्वर्णिम समय—दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा गोल्डन ऑवर कहलाता है, जो घायल के जीवन के लिए अत्यंत निर्णायक होता है। इस अवधि में यदि घायल को प्राथमिक चिकित्सा अथवा अस्पताल पहुँचाया जाए तो उसके बचने की संभावना 70 से 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। —याद रखें—थोड़ी सी तत्परता जीवनदान बन सकती है और थोड़ी सी लापरवाही अपूरणीय क्षति।
—ट्रैफिक नियम, सुरक्षा की ढाल—सड़क सुरक्षा नियम कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा के लिए बनाए गए सुरक्षा कवच हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग, निर्धारित गति सीमा का पालन, शराब या नशे की अवस्था में वाहन न चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग न करना, ट्रैफिक सिग्नल, ज़ेब्रा क्रॉसिंग एवं लेन अनुशासन का पालन—ये सभी नियम यदि ईमानदारी से अपनाए जाएँ तो दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। नियमों की अनदेखी न केवल स्वयं के जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि दूसरों की जान भी जोखिम में डाल देती है तथा कानूनी दंड और आर्थिक क्षति का कारण बनती है।—जिलेवासियों से भावनात्मक अपील—-जिले के समस्त नागरिकों से करबद्ध अपील है कि सड़क को केवल मार्ग नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी समझें।
स्वयं नियमों का पालन करें, अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी इसके लिए प्रेरित करें तथा किसी भी दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति की मदद करने से पीछे न हटें। आपका एक मानवीय कदम किसी की साँसों की डोर थाम सकता है।आइए, हम सब मिलकर सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाएं और एक सुरक्षित, संवेदनशील एवं जिम्मेवार समाज का निर्माण करें।
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